बलरामपुर में 3-1 का हिसाब, 2027 में क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?

नेपाल सीमा से सटा और ऐतिहासिक देवीपाटन मंदिर की पहचान रखने वाला बलरामपुर जिला राजनीतिक रूप से हमेशा से संवेदनशील और कड़े चुनावी मुकाबलों का गवाह रहा है। जिले की राजनीतिक बनावट में हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात हर चुनाव को बेहद करीबी बना देता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिले की चारों विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मुख्य मुकाबला तय माना जा रहा है।
वर्तमान में जिले की चार सीटों में से तीन पर भाजपा और एक पर सपा का कब्जा है।
2022 के नतीजे: तीन सीटों पर भाजपा, गैंसड़ी में सपा की जीत
बलरामपुर जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं—तुलसीपुर, गैंसड़ी, उतरौला और बलरामपुर (सदर)। इनमें से बलरामपुर सदर सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जबकि बाकी तीनों सीटें सामान्य वर्ग में आती हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर परिणाम इस प्रकार रहे:
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तुलसीपुर: भाजपा के कैलाशनाथ शुक्ला ने निर्दलीय प्रत्याशी जेबा रिजवान को करीब 36 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह जिले की सबसे बड़ी जीत थी।
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गैंसड़ी: सपा के डॉ. शिव प्रताप यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह ‘शैलू’ को 5,837 वोटों के अंतर से पराजित किया।
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उतरौला: भाजपा के रामप्रताप वर्मा (शशिकांत वर्मा) ने सपा के हसीब खान को 21,769 वोटों से मात दी।
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बलरामपुर (सदर – सुरक्षित): भाजपा के पलटू राम ने सपा प्रत्याशी जगराम पासवान को 10,971 वोटों से हराया।
गैंसड़ी में सपा की पुरानी पकड़ और 2024 का उपचुनाव
2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के दौरान भाजपा ने बलरामपुर की सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया था। हालांकि 2022 में सपा ने गैंसड़ी सीट जीतकर इस किले में सेंध लगाई।
गैंसड़ी सीट सपा का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही है, जहां से डॉ. शिव प्रताप यादव ने 1993, 2002 और 2012 में भी जीत दर्ज की थी। उनके निधन के बाद नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा ने इस सीट को बरकरार रखा। उपचुनाव में सपा उम्मीदवार राकेश कुमार यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह को 9,437 वोटों से हराकर जीत हासिल की, जिससे जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा।
विधानसभावार जातीय और सामाजिक समीकरण
जिले की चारों सीटों पर जीत-हार तय करने वाले सामाजिक समीकरण अलग-अलग हैं:
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बलरामपुर सदर (सुरक्षित): यहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी सबसे बड़ा समूह है। इसके बाद कंहार, प्रजापति और गौड़ समुदाय की निर्णायक संख्या है।
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तुलसीपुर: इस सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव परिणाम तय करता है।
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गैंसड़ी: इस विधानसभा में पारंपरिक यादव और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ मुख्य चुनावी आधार बनता है।
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उतरौला: जिले में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी इसी सीट पर है। इसके साथ ही वर्मा समाज और अन्य पिछड़ी जातियों का वोट बैंक यहां अहम भूमिका निभाता है।
जिले की आबादी, साक्षरता और सामाजिक ढांचा
2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, बलरामपुर की कुल आबादी लगभग 21 लाख 49 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 11 लाख 15 हजार और महिलाओं की संख्या 10 लाख 34 हजार है। जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 928 महिलाएं है।
साक्षरता के मामले में यह जिला राज्य के पिछड़े इलाकों में शामिल है। यहां की कुल साक्षरता दर लगभग 50 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 60 प्रतिशत और महिला साक्षरता मात्र 38 प्रतिशत दर्ज की गई थी। धार्मिक आधार पर जिले में लगभग 62 प्रतिशत हिंदू और करीब 37 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा, जिले की 92 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
2027 की बिसात: सपा की PDA महापंचायत से गरमाया माहौल
आगामी 2027 चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने जमीनी सक्रियता बढ़ा दी है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में समाजवादी पार्टी ने बलरामपुर सदर सीट पर बड़ी ‘पीडीए’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान सपा नेताओं ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और हर घर तक संपर्क अभियान चलाने पर जोर दिया, जबकि भाजपा भी जिले में अपनी तीनों सीटें बचाने और गैंसड़ी में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है।

