Infosys, TCS, Wipro पर अमेरिकी रोक, भारतीय कर्मचारियों के लिए अब क्या

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Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और दिग्गज टेक कंपनियों को अमेरिकी प्रशासन ने करारा झटका दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) ने इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में PERM व्यवस्था का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस फैसले से अमेरिका में कार्यरत भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेष रूप से वे कर्मचारी सीधे प्रभावित होंगे, जो इस समय अस्थायी वर्क वीजा पर हैं और स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे थे।

जांच के घेरे में टेक दिग्गज, माइक्रोसॉफ्ट पर भी गाज

कार्रवाई का विवरण देते हुए अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने स्पष्ट किया कि कई बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ संघीय जांच (Federal Investigations) जारी हैं। उन्होंने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के साथ-साथ अमेरिकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट और एडॉब को भी PERM प्रोग्राम से निलंबित करने की घोषणा की। श्रम मंत्री ने माइक्रोसॉफ्ट पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनी ने इस प्रणाली का सबसे अधिक दुरुपयोग किया है।

अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और वीजा आवेदन: जेडी वेन्स का आरोप

इस प्रशासनिक कदम के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने तकनीकी कंपनियों के रवैये पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने विशेष तौर पर माइक्रोसॉफ्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने वर्ष 2025 में लगभग 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, लेकिन साथ ही यह तर्क दिया कि उसे स्थानीय स्तर पर योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं।

वेन्स के अनुसार, इसी अवधि के दौरान कंपनी को 6,000 से अधिक H-1B वीजा की मंजूरी मिली और उसने 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि इनमें से लगभग 1,000 PERM आवेदन उन्हीं पदों के लिए किए गए थे, जिन पदों से पहले अमेरिकी नागरिकों की छंटनी की गई थी।

क्या H-1B वीजा पर पड़ेगा सीधा असर?

श्रम विभाग के इस आदेश का यह अर्थ कतई नहीं है कि संबंधित कंपनियों के मौजूदा H-1B वीजा रद्द कर दिए गए हैं। टेक कंपनियां अब भी H-1B वीजा धारक कर्मचारियों को काम पर रख सकती हैं और उनका संचालन जारी रख सकती हैं।

हालांकि, निलंबन प्रभावी रहने तक ये कंपनियां नए PERM आवेदन जमा नहीं कर सकेंगी और पहले से लंबित आवेदनों पर भी रोक लगी रहेगी। इस रुकावट के चलते कंपनियों का कानूनी व प्रशासनिक खर्च बढ़ेगा और कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया ठप हो जाएगी।

क्या होता है PERM प्रोग्राम?

परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली अनिवार्य प्रशासनिक मंजूरी है। इसके तहत किसी भी अमेरिकी कंपनी को यह साबित करना होता है कि किसी स्थायी पद के लिए योग्य अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं हैं। इस प्रमाणन के आधार पर ही कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी दे पाती हैं और उनके लिए ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) की प्रक्रिया शुरू की जाती है।