पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, बेटे मल्हार ने दी अंतिम विदाई

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भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर, 2026 को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया। गुरुवार को पुणे स्थित उनके पैतृक गांव डोंजे में पूरे राजकीय सम्मान और तीन गन सैल्यूट (तोपों की सलामी) के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। अभिनेता के अंतिम दर्शन के लिए श्मशान घाट पर हजारों की तादाद में प्रशंसकों और गणमान्य हस्तियों का हुजूम उमड़ पड़ा।

राजकीय सम्मान और 3 गन सैल्यूट के साथ अंतिम संस्कार

नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को पारंपरिक ताल-मृदंग की गूंज के बीच अंतिम यात्रा के लिए लाया गया। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया और पुलिस बल द्वारा 3 गन सैल्यूट देकर सलामी दी गई।

अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत राजनीति और सिनेमा जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने पहुंचकर दिवंगत अभिनेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

45 मिनट तक दिया गया सीपीआर, सुबह 5:20 बजे घोषित किया मृत

मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार तड़के नाना पाटेकर की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। रात करीब 2:30 बजे से ही उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी। उन्होंने देर रात अपने एक परिचित को फोन करने की कोशिश भी की थी, लेकिन बात नहीं हो सकी।

सुबह जब उन्हें कमरे में बेसुध पाया गया तो फौरन अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया गया। हालांकि, उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई और अंततः डॉक्टरों ने सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

3 राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्म श्री और यादगार किरदारों का सफर

1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के एक मराठी परिवार में जन्मे नाना पाटेकर ने चार दशकों से अधिक समय तक अपने अनूठे अभिनय और संवाद अदायगी से भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी।

  • फिल्मी सफर की शुरुआत: उन्होंने 1978 में निर्देशक मुजफ्फर अली की फिल्म ‘गमन’ से बॉलीवुड में कदम रखा था, जिसमें उनके साथ फारूक शेख और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिकाओं में थे।

  • सम्मान और पुरस्कार: सिनेमा और कला के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Award) से नवाजा गया। साल 2013 में उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था।

  • यादगार फिल्में: ‘नटसम्राट’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘यशवंत’, ‘वजूद’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार दर्शकों के जेहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गए।

स्क्रीन पर उन्हें आखिरी बार फिल्म ‘ओ रोमियो’ में देखा गया था, जबकि उनकी आगामी हॉरर कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ पाइपलाइन में थी। उनके अचानक चले जाने से कला और सिनेमा जगत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।