कांग्रेस की मांग पर सपा में नाराजगी, अखिलेश ने नेताओं को दी नसीहत

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अंदरखाने खींचतान के संकेत मिलने लगे हैं। कांग्रेस राज्य में करीब 150 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस का मुख्य फोकस खास तौर पर उन 100 विधानसभा सीटों पर है, जहां सपा 2007 के बाद से अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाई है। रणनीतिक रूप से कांग्रेस इन सीटों को अपने खाते में लेना चाहती है, जो आने वाले समय में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे का सबसे बड़ा सियासी पेच बन सकता है।
कांग्रेस का फॉर्मूला: जहां सपा हारी, वहां हमारा दावा
कांग्रेस सिर्फ सीटों की संख्या नहीं बढ़ाना चाहती, बल्कि उन सीटों का भी हिसाब-किताब खंगाल रही है जहां सपा चुनाव तो लड़ती रही लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
पार्टी का तर्क है कि जिन सीटों पर सपा लगातार मजबूत प्रदर्शन के बावजूद कुछ हजार वोटों के मामूली अंतर से हार गई, वहां कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक और संगठन के दम पर जीत दर्ज कर सकती है। सीट बंटवारे में कांग्रेस की रणनीति अब सिर्फ यह देखने की नहीं है कि पिछली बार कौन सी सीट किसके पास थी, बल्कि वह जीत की वास्तविक संभावना (Winnability) को आधार बनाना चाहती है। 100 कमजोर सीटों को दावे का आधार बनाने का कांग्रेस का यह फॉर्मूला सपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि अखिलेश यादव अपने सक्रिय संगठन वाली सीटों को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
बयानबाजी से गर्माया माहौल, बातचीत की राह में अड़चन
सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच अभी कोई निर्णायक बातचीत शुरू नहीं हुई है, लेकिन नेताओं की बयानबाजी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की ओर से सीटों को लेकर दिए जा रहे संकेतों को सपा के भीतर सहजता से नहीं लिया जा रहा है।
हाल ही में लखनऊ में हुई एक बैठक में अखिलेश यादव का खुद शामिल न होकर अपने संसदीय प्रतिनिधि को भेजना भी गठबंधन के भीतर चल रही इस संवेदनशील बातचीत का एक कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर संगठन को फिर से जमीन पर मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं सपा के सामने अपने मौजूदा राजनीतिक आधार और 2027 की चुनावी रणनीति को बचाए रखने की चुनौती है।
दलित वोटबैंक और आरक्षित सीटों पर कांग्रेस की नजर
सीट बंटवारे की इस रणनीति में राज्य की आरक्षित विधानसभा सीटें भी कांग्रेस के लिए अहम हैं। यूपी में कुल 86 आरक्षित सीटें हैं, जिनमें 84 अनुसूचित जाति (SC) और 2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में इन आरक्षित सीटों में से सपा के सिंबल पर 16 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि भाजपा का आंकड़ा लगभग 65 सीटों तक पहुंच गया था। कांग्रेस इन आरक्षित सीटों पर अपना दावा मजबूत करके सिर्फ गठबंधन में हिस्सेदारी नहीं मांग रही, बल्कि दलित मतदाताओं के बीच अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कवायद भी कर रही है।

