कासगंज 2027: 3 सीटों पर जातीय समीकरण कितना अहम, जानिए पूरा गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Election 2027) को लेकर अभी से सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। हर जिले के चुनावी गणित और समीकरणों को समझना बेहद अहम है। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे एटा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कासगंज जिले की तीन विधानसभा सीटों—कासगंज, अमांपुर और पटियाली के चुनावी समीकरण, पिछले चुनावों के नतीजों और वहां के जातीय गणित की।
कासगंज जिले का ओवरऑल चुनावी गणित
कासगंज जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां की 3 में से 2 सीटों (कासगंज और अमांपुर) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत हासिल की थी, जबकि 1 सीट (पटियाली) पर समाजवादी पार्टी (SP) को जीत मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी जब इन विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े सामने आए, तो नतीजा बिल्कुल वैसा ही रहा—2 सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिली और 1 सीट पर सपा ने अपनी बढ़त कायम रखी।
कभी कासगंज समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ हुआ करता था, लेकिन पिछले कई चुनावों से बीजेपी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह जिला एटा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से 2009 में यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह निर्दलीय सांसद चुने गए थे। 2014 और 2019 में यहां से बीजेपी (कल्याण सिंह के बेटे) जीती, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के देवेश शाक्य ने बीजेपी को हराकर एटा लोकसभा सीट अपने नाम कर ली।
आइए, अब कासगंज जिले की तीनों विधानसभा सीटों का विस्तृत चुनावी विश्लेषण करते हैं:
1. कासगंज विधानसभा सीट (Kasganj Assembly Seat – 100) कासगंज उत्तर प्रदेश की 100वें नंबर की विधानसभा सीट है। यह मुख्य रूप से लोधी बाहुल्य क्षेत्र है, हालांकि यहां शाक्य और बघेल मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी 1993 में इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इतिहास देखें तो कहा जाता है कि जो पार्टी कासगंज सीट जीतती है, राज्य में सरकार उसी की बनती है।
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2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे: 2022 में बीजेपी के देवेन्द्र सिंह राजपूत (1,23,410 वोट) ने सपा के मानपाल सिंह (77,145 वोट) को लगभग 46 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
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2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे: 2024 में बीजेपी (1,13,678 वोट) ने सपा (90,238 वोट) को फिर पछाड़ा, लेकिन हार-जीत का अंतर घटकर 23 हजार रह गया। 2022 में बीजेपी को शाक्य वोट मिले थे, लेकिन 2024 में यह वोट सपा प्रत्याशी की तरफ शिफ्ट हो गया।
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जातीय समीकरण (अनुमानित): लोधी: 80,000 | एससी: 50,000 | मुस्लिम: 40,000 | यादव: 40,000 | शाक्य: 25,000 | ठाकुर: 25,000 | बघेल: 20,000 | बनिया: 18,000 | निषाद: 15,000 | ब्राह्मण: 11,000। (यहाँ मुस्लिम और यादव मिलकर करीब 80 हजार हैं, लेकिन जीत की चाबी शाक्य, ठाकुर, बघेल और अति पिछड़ी जातियों के हाथों में रहती है।)
2. अमांपुर विधानसभा सीट (Amanpur Assembly Seat – 101) अमांपुर सीट लोधी, एससी और शाक्य बाहुल्य है। इस विधानसभा में निषाद और ठाकुर मतदाता हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस आखिरी बार यहां 1985 में जीती थी। बीजेपी 1991, 1993, 1996, 2017 और 2022 में यहां से जीती है। सपा आज तक इस सीट से विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाई है।
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2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे: 2022 में बीजेपी के हरिओम वर्मा (96,377 वोट) ने सपा के सत्यभान शाक्य (53,048 वोट) को 43 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था।
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2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे: 2024 में बीजेपी (86,522 वोट) ने सपा (81,733 वोट) को हराया जरूर, लेकिन जीत का अंतर मात्र 5 हजार वोटों का रह गया। इसका मुख्य कारण शाक्य मतदाताओं का पूरी तरह से सपा की तरफ शिफ्ट होना माना गया।
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जातीय समीकरण (अनुमानित): लोधी: 60,000 | एससी: 52,000 | शाक्य: 45,000 | ठाकुर: 30,000 | मुस्लिम: 30,000 | यादव: 25,000 | निषाद: 25,000 | बघेल: 15,000 | ब्राह्मण: 12,000 | बनिया: 10,000। (जब तक ठाकुर, निषाद और शाक्य वोट बीजेपी के साथ रहते हैं, पार्टी मजबूत रहती है। इनमें से एक भी वर्ग के खिसकने पर सपा कड़ी टक्कर में आ जाती है।)
3. पटियाली विधानसभा सीट (Patiyali Assembly Seat – 102) पटियाली सीट मुस्लिम, ठाकुर और शाक्य बाहुल्य क्षेत्र है। 2017 में यह सीट बीजेपी ने जीती थी, लेकिन 2022 में सपा ने यहां जीत दर्ज की और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा ने यहां अपनी मजबूत बढ़त कायम रखी।
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2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे: 2022 में सपा की नादिरा सुल्तान (91,958 वोट) ने बीजेपी के ममतेश शाक्य (87,957 वोट) को लगभग 4 हजार वोटों के कड़े मुकाबले में हराया था। बसपा को करीब 30 हजार वोट मिले थे।
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2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे: 2024 में सपा (1,12,940 वोट) ने बीजेपी (69,842 वोट) पर बड़ी बढ़त हासिल की। सपा की जीत का अंतर 4 हजार से बढ़कर 42 हजार हो गया, क्योंकि शाक्य मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ जुड़ गया।
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जातीय समीकरण (अनुमानित): मुस्लिम: 75,000 | ठाकुर: 54,000 | एससी: 45,000 | यादव: 38,000 | शाक्य: 36,000 | बघेल: 22,000 | निषाद: 15,000 | ब्राह्मण: 15,000 | बनिया: 10,000। (इस सीट पर मुस्लिम और यादव वोट 1 लाख के पार हैं, जबकि सवर्ण (ठाकुर, पंडित, बनिया) 80 हजार के करीब हैं। हार-जीत का अंतिम फैसला शाक्य, बघेल और निषाद समाज करता है।)
2027 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर एक बार फिर बीजेपी और सपा के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है, जहां जातियों का ध्रुवीकरण और स्थानीय मुद्दे सबसे अहम होंगे।

