यूपी में सीटों पर तकरार, जानिए सपा-कांग्रेस का चुनावी रिपोर्ट कार्ड

rahul
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) एक बार फिर मिलकर यह चुनाव लड़ सकती हैं, हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक समझौते का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने 175 से अधिक सीटों की सूची सपा को सौंपी है, जबकि सपा ऐसे उम्मीदवारों की मांग कर रही है जो जीतने की स्थिति में हों। आइए नजर डालते हैं कि पिछले कुछ चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा है।

2012 का विधानसभा चुनाव: बिना गठबंधन के सपा की सरकार

सबसे पहले बात करते हैं वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव की, जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए थे। इस चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था।

  • सपा का प्रदर्शन: समाजवादी पार्टी ने 403 में से 401 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और 224 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। पार्टी को कुल वैध मतों का 29.13 फीसदी वोट मिला और अखिलेश यादव के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनी।

  • कांग्रेस का प्रदर्शन: कांग्रेस पार्टी ने 355 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे केवल 28 सीटों पर ही सफलता मिल सकी। कांग्रेस का वोट शेयर 11.65 फीसदी रहा था।

2017 का विधानसभा चुनाव: गठबंधन के बावजूद निराशाजनक नतीजे

इसके बाद, 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाया। समझौते के तहत सपा को 298 और कांग्रेस को 105 सीटों पर चुनाव लड़ना था, लेकिन कुछ सीटों पर बागी उम्मीदवारों के चलते दोनों दलों ने अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए और कुछ जगहों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ भी देखने को मिली।

  • गठबंधन का परिणाम: चुनाव परिणाम आने पर सपा 311 सीटों में से केवल 47 सीटें ही जीत पाई और उसे 21.82 फीसदी वोट मिले। वहीं, कांग्रेस 114 सीटों में से महज 7 सीटें ही जीत सकी और 29 सीटों पर उसकी जमानत भी जब्त हो गई। कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 6.25 फीसदी पर आ गया। इस चुनाव के बाद बीजेपी ने प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

2022 का विधानसभा चुनाव: अलग-अलग लड़े दल

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच कोई समझौता नहीं हुआ। सपा ने इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के साथ गठबंधन किया, जबकि कांग्रेस अकेले मैदान में उतरी।

  • सपा का प्रदर्शन: सपा ने 347 सीटों पर चुनाव लड़ा और 111 सीटों पर जीत हासिल की। पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 32.06 फीसदी पहुंच गया।

  • कांग्रेस का प्रदर्शन: कांग्रेस ने 399 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसे केवल 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। पार्टी का वोट शेयर गिरकर महज 2.36 फीसदी रह गया। इस चुनाव के बाद बीजेपी ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल किया।

लोकसभा चुनावों में कैसा रहा प्रदर्शन?

पिछले एक दशक में हुए लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो तस्वीर अलग रही है:

  • 2019 का लोकसभा चुनाव: इस चुनाव में सपा ने बसपा के साथ गठबंधन किया था, जबकि कांग्रेस अकेले लड़ी थी। कांग्रेस ने 67 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसे सिर्फ एक ‘रायबरेली’ सीट पर जीत मिली, और अमेठी में राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस को 6.36% और सपा को 18.11% वोट मिले, जिसके तहत सपा के खाते में 5 सीटें आईं।

  • 2024 का लोकसभा चुनाव: सपा और कांग्रेस ने मिलकर यह चुनाव लड़ा। समाजवादी पार्टी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 33.84 फीसदी वोट हासिल किए। वहीं, कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीटों पर जीत हासिल की और उसका वोट शेयर 9.53 फीसदी रहा।