परमाणु हमले की आशंका के बीच ईरान की चेतावनी जवाब की कोई सीमा नहीं

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम घरीबाबादी ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि देश के खिलाफ किसी भी प्रकार के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है, तो ईरान चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा और उसके हाथ बिल्कुल बंधे हुए नहीं हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे हालात में तेहरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल कानूनी उपायों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि कोई परमाणु संपन्न देश या उसका शीर्ष नेता ऐसे हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता है, तो इससे परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उनके मुताबिक, इससे दुनिया के अन्य देशों को भी अपनी रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने का प्रोत्साहन मिल सकता है, जिसके गंभीर क्षेत्रीय और वैश्विक परिणाम होंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी मीडिया में आ रही ऐसी संभावित धमकियों को लेकर तेहरान को अमेरिका की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक रुख नहीं मिला है।
‘सेवन-डे प्लान’ और कूटनीति पर रुख
कूटनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए घरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अमेरिका को दिए गए ‘सेवन-डे प्लान’ (Seven-Day Plan) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तेहरान इसी योजना को कूटनीतिक प्रयासों का आधार मानता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Storm of Hormuz) को फिर से खोलने की संभावनाओं से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं और यदि अमेरिका और अन्य पक्ष इस्लामाबाद समझौते (MoU) के प्रावधानों और तेहरान के समय-फ्रेम का पालन करते हैं, तो कूटनीतिक समाधान तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान अब भी खुद को युद्ध की स्थिति में मानता है और जब तक सैन्य आक्रामकता पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक देश के पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
अमेरिका-इजराइल के हमलों पर कानूनी कार्रवाई
ईरान के शीर्ष अधिकारियों पर हुए हमलों और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। घरीबाबादी ने घोषणा की कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के मामलों को अंतरराष्ट्रीय अदालतों में ले जाने के लिए कानूनी तंत्र सक्रिय कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मामलों की समीक्षा के एजेंडे में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई के मामले को भी शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट ‘डेना’ (Dena) पर हुए घातक अमेरिकी हमले के मामले को भी कानूनी दायरे में लाया जा रहा है, जिसे ईरान की प्राथमिक प्राथमिकताओं में रखा गया है।
अमेरिकी चुनावों पर दो टूक प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों और वहां की राजनीति का ईरान की नीतियों पर पड़ने वाले असर को खारिज करते हुए घरीबाबादी ने साफ किया कि तेहरान की नीतियां किसी अन्य देश के चुनावी घटनाक्रमों के आधार पर तय नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनाव पूरी तरह से वहां के नागरिकों का अंदरूनी मामला है। ईरान अपने फैसले और कदम केवल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और देशहित को सर्वोपरि रखकर उठाता है, न कि किसी बाहरी कारक से प्रभावित होकर।

