सोनम वांगचुक और लद्दाख प्रशासन आमने-सामने, स्कूल को लेकर बढ़ा विवाद

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अजमल शाह
अजमल शाह

लद्दाख के जाने-माने जलवायु और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके संस्थान ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख’ (HIAL) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संस्थान की जमीन का आवंटन रद्द होने का मामला पहले ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में लंबित है। अब लद्दाख प्रशासन ने लेह स्थित ‘डेजर्ट फ्लावर स्कूल’ को बिना आवश्यक मंजूरी के कक्षाएं और अन्य गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगाते हुए काम रोकने का नोटिस थमा दिया है।

CJP ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

इस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। दीपके ने कहा, “सरकार को सोनम वांगचुक के स्कूल मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए थी और देशभर में ऐसे और स्कूल खोलने चाहिए थे। लेकिन इसके बजाय, सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के स्थान पर बदले की भावना से काम कर रही है और सकारात्मक बदलाव लाने वालों को ही अपना निशाना बना रही है।”

सोनम वांगचुक का पलटवार: ‘यह शाही फरमान है’

प्रशासन के नोटिस के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने प्रशासन के नोटिस को ‘शाही फरमान’ करार दिया और लिखा, “लद्दाख के उपराज्यपाल का हमारे स्कूल पर शाही फरमान… वे इसे बंद कराना चाहते हैं।”

वांगचुक ने दावा किया कि उनके स्कूल को लेकर भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि संसद की शिक्षा समिति ने HIAL को पूरे देश के लिए एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा, लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में इसे जगह मिली है और टाइम मैगजीन ने इसे ‘टाइम 100 क्लाइमेट सॉल्यूशंस’ में शामिल किया था।

पत्नी गीतांजलि आंगमो को मिला नोटिस

लेह के तहसीलदार की ओर से जारी यह नया नोटिस HIAL की संस्थापक और सीईओ डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो (सोनम वांगचुक की पत्नी) को भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि 22 सितंबर को डॉ. आंगमो ने फ्यांग स्थित डेजर्ट फ्लावर स्कूल की प्रबंधन समिति के सदस्यों के लिए एनओसी (NOC) मांगी थी। लेकिन प्रशासन का आरोप है कि अनुमति मिलने से पहले ही स्कूल में गतिविधियां शुरू कर दी गईं। नोटिस में हिदायत दी गई है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, स्कूल का संचालन बंद रखा जाए ताकि लंबित मामले पर असर न पड़े।

क्या है 1076 कनाल जमीन का पूरा विवाद?

यह सारा विवाद HIAL को आवंटित जमीन से शुरू हुआ था।

  • मई 2018: वैकल्पिक विश्वविद्यालय बनाने के लिए संस्थान को फ्यांग थांग में 1076 कनाल और एक मरला जमीन 40 साल की लीज पर आवंटित की गई थी।

  • अगस्त 2025: लद्दाख प्रशासन ने आरोप लगाया कि संस्थान ने लीज की शर्तें पूरी नहीं कीं और विश्वविद्यालय स्थापित नहीं किया, इसलिए जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया।

  • सितंबर: HIAL ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने प्रशासन को विवादित जमीन पर तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने से रोक दिया, लेकिन आवंटन रद्द करने के फैसले पर स्टे नहीं लगाया।

दावों में भारी विरोधाभास

अक्टूबर में प्रशासन ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि HIAL एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय नहीं है। प्रशासन का तर्क है कि अनिवार्य भूमि प्रीमियम जमा नहीं करने के कारण आवंटन मई 2019 में ही स्वतः समाप्त हो गया था।

दूसरी ओर, डॉ. गीतांजलि आंगमो और वांगचुक का दावा है कि उन्होंने जमीन आवंटन के 15 दिन बाद ही लीज डीड के लिए आवेदन कर दिया था। वांगचुक ने प्रशासन पर लालफीताशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने लीज के लिए 5 लिखित अपील कीं, 15 बार मुलाकात की और 30 बार फोन किया, लेकिन प्रशासन ने ही देरी की।

वांगचुक का सीधा आरोप है कि लद्दाख के अधिकारों के लिए उनकी सक्रियता के कारण ही उन्हें इस जमीन विवाद के जरिए राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।