अनाज महंगा, फसलें बर्बाद, युगांडा में क्यों बढ़ रही है भूख की समस्या?

अफ्रीका के ‘फूड बास्केट’ (खाद्य भंडार) कहे जाने वाले युगांडा में इन दिनों रोटी और रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। हाल ही में युगांडा एसोसिएशन ऑफ बेकर्स ने गेहूं और ईंधन की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए नवंबर में रोटी के दाम 5,500 शिलिंग (Shs) से बढ़ाकर 6,500 शिलिंग करने का ऐलान किया है। केवल रोटी ही नहीं, बैंक ऑफ युगांडा की अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य पदार्थों की महंगाई के कारण देश की हेडलाइन मुद्रास्फीति (Inflation) अगस्त के 4.1% से बढ़कर सितंबर में 4.6% हो गई है।
भुखमरी के साथ बढ़ रहा मानसिक स्वास्थ्य का संकट
बढ़ती महंगाई ने नागरिक समाज संगठनों (Civil Society Organisations) की चिंता बढ़ा दी है। उनका मानना है कि इससे उन समुदायों में भूख का संकट और गहरा जाएगा जो पहले से ही दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
फूड राइट्स एलायंस की कार्यकारी निदेशक एग्नेस किराबो ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, “युगांडा के मानकों के आधार पर ‘पोशो’ (मक्के का दलिया) और बीन्स संघर्षरत परिवारों का खाना माना जाता था। लेकिन अब यह अमीरों का खाना हो गया है। एक किलो बीन्स 7,000 से 8,000 शिलिंग के बीच बिक रहा है, जबकि पोशो लगभग 4,000 शिलिंग का है।”
किराबो ने हाल ही में ‘नेशनल हाई-लेवल पोस्ट वर्ल्ड फूड डे पॉलिसी डायलॉग’ में चेतावनी दी कि यह खाद्य संकट परिवारों में मानसिक स्वास्थ्य का बोझ बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा, “सबसे बुरी बात यह है कि इस खाद्य संकट के कारण रोजाना खाना जुटाने की चिंता और डिप्रेशन में हममें से बहुत से लोग मानसिक रूप से बीमार होने वाले हैं।”
44 लाख लोगों तक पहुंच सकता है भुखमरी का आंकड़ा
युगांडा सरकार और संयुक्त राष्ट्र द्वारा पिछले सप्ताह जारी ‘एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण’ (IPC) विश्लेषण के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल लगभग 36 लाख लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा (Acute Food Insecurity) के उच्च स्तर का सामना कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अगले साल की शुरुआत तक यह आंकड़ा बढ़कर 44 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।
सूखा, बेमौसम गर्मी और एल नीनो का कहर
कृषि उत्पादन के मोर्चे पर भी युगांडा बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। अप्रैल के अंत में शुरू हुए सूखे और असामान्य रूप से उच्च तापमान ने देश के कई हिस्सों में फसलों, चरागाहों और जल स्रोतों को तबाह कर दिया है।
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करमोजा (Karamoja): यहां जून तक अधिकांश क्षेत्रों में 50 से 70 प्रतिशत तक फसल बर्बाद होने की रिपोर्ट दर्ज की गई।
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ग्रेटर मकासा और ग्रेटर लुवेरो: इन क्षेत्रों में समुदायों ने फसल नष्ट होने, जल स्रोत सूखने और पशुओं के लिए चारे की कमी की शिकायत की है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का अनुमान है कि फरवरी 2027 तक ‘एल नीनो’ (El Niño) की स्थिति बनी रहेगी। इससे कृषि उत्पादन में और अधिक बाधा आने तथा बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है।
बच्चों पर मंडराता कुपोषण का साया
इस संकट का सबसे गंभीर असर बच्चों पर पड़ रहा है। IPC विश्लेषण का अनुमान है कि मार्च 2026 और फरवरी 2027 के बीच करमोजा में छह से 59 महीने की उम्र के लगभग 1,22,100 बच्चे गंभीर कुपोषण (Acute Malnutrition) का शिकार होंगे। इनमें से 30,600 बच्चों के अत्यधिक गंभीर कुपोषण (Severe Malnutrition) की स्थिति में पहुंचने की आशंका है।
समाधान की तलाश: क्या है सांसदों और संगठनों की राय?
मावोकोटा नॉर्थ से सांसद और संसद की कृषि, पशु उद्योग और मत्स्य पालन समिति की अध्यक्ष अमेलिया क्यामबड्डे ने इन आंकड़ों पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा, “विसंगति यह है कि युगांडा को अफ्रीका का फूड बास्केट माना जाता है। और जब आप यहां बैठकर भुखमरी और कुपोषण के आंकड़े देखते हैं, तो यह चौंकाने वाला होता है।” उन्होंने नीति निर्माताओं से सीधे किसानों से जुड़ने और कृषि, जल, स्वास्थ्य क्षेत्रों तथा गैर-सरकारी संगठनों के बीच मजबूत सहयोग की अपील की।
इस बीच, कई कृषि संगठन तकनीक का सहारा ले रहे हैं। वेल्थुंगरहिल्फ (WHH) ने पाम कॉर्प्स के साथ मिलकर ‘iKnowFarm’ नाम का एक डिजिटल एग्रीकल्चरल एप्लीकेशन विकसित किया है। WHH की कंट्री डायरेक्टर जेनेट रेनहोल्ड्स के मुताबिक, 8 भाषाओं में उपलब्ध इस ऐप से अब तक 70,000 से अधिक किसान (खासकर वेस्ट नाइल और करमोजा में शरणार्थी और मेजबान समुदाय) खेती की तकनीक, पोषण, कीट नियंत्रण और जैविक उर्वरकों की जानकारी ले रहे हैं और अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाश रहे हैं।

