900 टन से ज्यादा कचरा जमा, भोपाल में सफाई व्यवस्था पर हड़ताल की मार

bhopal
संजीव पॉल
संजीव पॉल

मध्य प्रदेश में दिवाली के ऐन मौके पर सफाई व्यवस्था का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नियमित नौकरी, बेहतर वेतन और आउटसोर्सिंग प्रथा खत्म करने जैसी मांगों को लेकर राज्य भर के करीब 2 लाख से अधिक सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राजधानी भोपाल समेत कई नगर निगम क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन (घर-घर से कचरा उठाना) पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे त्योहारी सीजन में बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं।

क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?

मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में कर्मचारियों की मुख्य रूप से ये मांगें शामिल हैं:

  • आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समाप्ति: ठेका प्रथा (आउटसोर्सिंग) बंद कर कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति दी जाए।

  • वेतन वृद्धि: कर्मचारियों को कम से कम 25 हजार रुपये का मासिक वेतन दिया जाए।

  • अनुकंपा नियुक्ति: पात्र आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ तुरंत मिले।

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वर्षों से उनकी मांगें लंबित हैं। जब तक सरकार इन मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह हड़ताल खत्म नहीं की जाएगी।

निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन, सरकार से वार्ता रही बेनतीजा

हड़ताल के दूसरे दिन बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों ने भोपाल नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया।

संगठन के अध्यक्ष मगन झांझोट ने बताया कि बुधवार को उनकी शहरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ बातचीत हुई थी, लेकिन इसमें कोई सहमति नहीं बन सकी और वार्ता बेनतीजा रही। अब कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने की तैयारी कर रहा है।

भोपाल में रोज निकलता है 850 टन कचरा, व्यवस्था पूरी तरह चरमराई

इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सबसे ज्यादा असर राजधानी भोपाल में देखने को मिल रहा है। शहर के सभी 85 वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में रोजाना करीब 850 टन कचरा निकलता है। सामान्य दिनों में 400 से अधिक वाहन घर-घर जाकर इसे एकत्र करते हैं और शहर के 17 ट्रांसफर स्टेशनों के जरिए आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र तक पहुंचाते हैं। हड़ताल के कारण यह पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। दिवाली से पहले बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़ के बीच कचरे का यह अंबार प्रशासन और आम जनता, दोनों के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन गया है।