कभी आंदोलनों की पहचान था जंतर-मंतर, अब तीन नए प्रदर्शन स्थल तय

jantarmantar
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

दिल्ली के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर और उसके आसपास रहने वाले निवासियों को लंबे समय से चली आ रही पाबंदियों से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली पुलिस ने इलाके में आम लोगों की आवाजाही रोकने के लिए लगाए गए अवरोधकों (Barricades) को आखिरकार हटा दिया है।

यह अहम फैसला गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। इस सिफारिश के तहत हाल ही में जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों (Authorized Protest Sites) की सूची से बाहर कर दिया गया था।

लोगों को हो रही थी भारी परेशानी

जंतर-मंतर के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासी लंबे समय से पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और आवाजाही पर लगी रोक को लेकर शिकायत कर रहे थे। उनका कहना था कि इन पाबंदियों के कारण उनके रोजमर्रा के काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। लोगों को अपने ही घरों तक पहुंचने और आसपास की सड़कों से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अपनी परेशानी को लेकर कुछ स्थानीय निवासियों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था।

‘CJP’ और छात्रों के प्रदर्शन से बढ़ी थी सुरक्षा

हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के उग्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी, ताकि लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर बिना अनुमति मार्च न निकाल सकें। हालांकि, इन कड़े सुरक्षा इंतजामों का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा।

अब कहां होंगे दिल्ली में प्रदर्शन?

दिल्ली पुलिस आयुक्त के स्थायी आदेश के तहत 11 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। अब भविष्य में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरने के लिए तीन नई वैकल्पिक जगहें तय की गई हैं:

  1. मध्य दिल्ली: रामलीला मैदान

  2. पूर्वी दिल्ली: सीबीडी मैदान

  3. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली: बुराड़ी मैदान

अब किसी भी अधिकृत प्रदर्शन के लिए इन्हीं जगहों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस की दलील

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट की। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत के सामने दाखिल जवाबी हलफनामे में दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने बताया कि “किसी भी सार्वजनिक सड़क को स्थायी रूप से प्रदर्शन स्थल नहीं बनाया जाना चाहिए।”

पुलिस ने अपनी दलील में जंतर-मंतर को अनुपयुक्त बताने के पीछे ये मुख्य कारण गिनाए:

  • यातायात में लगने वाला भारी जाम।

  • आम लोगों की सुरक्षा और आपात स्थिति में एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की पहुंच में दिक्कत।

  • महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को खतरा (जंतर-मंतर के 3-4 किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास, राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय मौजूद हैं)।

दशकों के आंदोलनों का गवाह रहा है जंतर-मंतर जंतर-मंतर दशकों से भारत के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन अब बैरिकेड्स हटने से जहां स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, वहीं इस ऐतिहासिक स्थल पर धरने-प्रदर्शनों का दौर अब खत्म हो गया है।