नेहा बोरा के बयान पर बीजेपी ने खोला मोर्चा, राहुल गांधी से भी जोड़ा विवाद

स्टूडेंट एक्टिविस्ट नेहा बोरा द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नेहा बोरा की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए उनपर और कांग्रेस पार्टी पर हिंदू धर्म को बदनाम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि बोरा की बातें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों जैसी ही हैं और यह बयान सनातन धर्म के खिलाफ एक सुनियोजित वैचारिक अभियान को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि ये बयान राहुल गांधी से प्रेरित हैं, और आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की पूरी विचारधारा भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है। भंडारी ने कहा, “यह वही कांग्रेस पार्टी है जिसने ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था… इससे यह साफ होता है कि कांग्रेस का डीएनए हिंदू-विरोधी और सनातन-विरोधी है।”
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव के दौरान दिया था बयान
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) से जुड़ीं नेहा बोरा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन कर रही थीं। मतदाता सूची से नाम हटाने और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि “वोट की पवित्रता को तार-तार कर दिया गया है।” इसी दौरान उन्होंने जाति और धार्मिक व्यवस्था को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं।
बोरा ने अपने बयान में कहा था कि महिलाओं को कथित “ब्राह्मणवादी व्यवस्था” से सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था के तहत महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और मंदिरों के भीतर पुजारी यौन शोषण व दुष्कर्म जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
बकरवाल समुदाय की घटना और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
अपने बयान के समर्थन में, बोरा के समर्थकों द्वारा जनवरी 2018 के कठुआ मामले का हवाला दिया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के बकरवाल समुदाय की आठ साल की बच्ची के साथ एक मंदिर में हुए अपराध में अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई थी।
दूसरी ओर, इस बयान को लेकर तीखी आलोचना भी हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ‘सनातनिकिड्स’ जैसे मंचों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि व्यक्तिगत अपराधों के आधार पर एक पूरे समुदाय पर व्यापक और गंभीर आरोप लगाना गलत है। समूहों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका उपयोग किसी समुदाय को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस विवाद के तूल पकड़ने से आगामी दिनों में राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।

