नागपुर में जल संकट के कारण 900 करोड़ की सीमेंट सड़कों का निर्माण रुका
INDIA - MARCH 20: The Imperial Towers twin towers residential skyscrapers and business district development in Tardeo South Mumbai, India from Nariman Point (Photo by Tim Graham/Getty Images)

महाराष्ट्र में सूखे और पानी की किल्लत की आशंका का सीधा असर अब बड़े विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। संभावित जल संकट की गंभीरता को देखते हुए नागपुर महानगर पालिका (NMC) ने 900 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 265 सीमेंट सड़कों का निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाने और उनकी तराई में भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में, उपलब्ध पानी को विकास कार्यों पर खर्च करने के बजाय शहरवासियों की पीने की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है।
900 करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक
NMC ने पांचवें चरण में होने वाले सीमेंट सड़क निर्माण के काम को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इस बड़ी परियोजना के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 265 सड़कों का कंक्रीटीकरण किया जाना था, जिनकी कुल लंबाई 89.22 किलोमीटर है।
गौरतलब है कि पांचवें चरण की शुरुआत में केवल 135 सड़कों के कंक्रीटीकरण की योजना बनाई गई थी। बाद में स्थानीय विधायकों और नगरसेवकों से मिले प्रस्तावों के आधार पर यह संख्या बढ़ाकर 265 कर दी गई। शहर में बड़े स्तर पर इस बुनियादी ढांचे के विकास की तैयारी थी, लेकिन पानी की कमी ने महानगर पालिका को अपनी प्राथमिकताएं बदलने पर मजबूर कर दिया है।
निजी निर्माण और पार्कों में भी पेयजल पर रोक
पानी बचाने की यह कोशिश केवल सरकारी सड़क परियोजनाओं तक ही सीमित नहीं है। अपर्याप्त बारिश, पानी की बढ़ती मांग और बांधों में लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए, महानगर पालिका ने निजी और व्यावसायिक निर्माण कार्यों में भी पीने के पानी (पेयजल) के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगा दी है।
इसके अलावा, शहर के पार्कों और उद्यानों की सिंचाई के लिए भी पीने के पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य साफ है कि फिलहाल उन सभी गतिविधियों में पेयजल का इस्तेमाल रोका जाए, जिन्हें टाला जा सकता है।
पानी की किल्लत ने बदली विकास की प्राथमिकता
नागपुर में लिया गया यह बड़ा फैसला संभावित जल संकट की गंभीरता को दर्शाता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जब तक जलाशयों और बांधों में पानी का पर्याप्त स्तर उपलब्ध नहीं होता, तब तक भारी मात्रा में पानी की खपत वाले सभी गैर-जरूरी कार्यों पर रोक जारी रहेगी।
महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में पानी की कमी का अलग-अलग असर देखा जा रहा है। एक तरफ जहां नंदुरबार जैसे इलाकों में महंगे चारे और दूध उत्पादन की बढ़ती लागत से पशुपालक परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ नागपुर जैसे बड़े शहर में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को पानी बचाने की खातिर रोकना पड़ रहा है।

