पूजा पंडालों तक पहुंचेगी चुनावी रणनीति, बिहार में NDA ने तेज किया जनसंपर्क

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शैलेन्द्र कुमार झा
शैलेन्द्र कुमार झा

बिहार में आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के दोनों प्रमुख घटक दलों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU)—ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। दोनों दलों ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान सार्वजनिक पंडालों में पहुंचे, आम लोगों से सीधा संवाद करें और एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी समर्थन जुटाएं।

राज्य में पूजा के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए सत्ताधारी गठबंधन ने इसे जनसंपर्क के एक प्रभावी मौके के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया है।

पंडालों में उपस्थिति और सीधे संपर्क का निर्देश

बिहार में नवरात्र और दुर्गा पूजा के मौके पर राजधानी पटना से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भव्य पंडाल सजते हैं, जहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। दोनों पार्टियों की रणनीति यह है कि इस दौरान उनके पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और सक्रिय कार्यकर्ता पंडालों में मौजूद रहें। कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे उत्सव के इस माहौल में लोगों के बीच जाकर संवाद स्थापित करें और उन्हें एनडीए के उम्मीदवारों के पक्ष में गोलबंद करें।

एमएलसी चुनाव के मद्देनजर रणनीति

दोनों दलों की नजर मुख्य रूप से आगामी एमएलसी चुनाव पर टिकी है। इसके लिए जमीनी स्तर पर नेताओं और कैडर को अभी से सक्रिय किया जा रहा है। गठबंधन की मंशा है कि मतदान से पहले ही उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल तैयार हो और लोगों से पार्टी का जीवंत संपर्क बना रहे। बिहार में बीजेपी और जेडीयू का पुराना गठबंधन है और दोनों दलों के साझा समन्वय का सीधा प्रभाव एमएलसी चुनाव के नतीजों पर पड़ता है। ऐसे में दोनों दल संयुक्त रूप से जमीन तैयार करने में जुटे हैं।

वोटर प्रोफाइल और जमीनी चुनौतियां

एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से पूरी तरह अलग होती है। इस चुनाव में सीट की श्रेणी के अनुसार मतदाता पहले से तय होते हैं।

स्थानीय निकाय कोटे की सीटों पर केवल त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि ही मतदान करते हैं। दूसरी ओर, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में संबंधित योग्यता रखने वाले पंजीकृत मतदाता ही वोट डालते हैं।

इस व्यवस्था के कारण हर सीट पर उम्मीदवारों को अपने लक्षित मतदाताओं तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचना पड़ता है। दुर्गा पूजा के पंडालों में अलग-अलग वर्गों के लोगों की मौजूदगी रहती है, जिससे नेताओं को अपने मतदाताओं, स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध वर्ग से सीधे मिलने और अपनी बात रखने का प्लेटफॉर्म मिल जाता है।