चित्रकूट की दो सीटों पर फिर सियासी संग्राम, सपा के सामने जीत की चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में शुमार चित्रकूट (Chitrakoot) पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। चित्रकूट जिले में दो विधानसभा सीटें—चित्रकूट और मानिकपुर—आती हैं।
पिछले कुछ चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने एक सीट पर परचम लहराया था, जबकि दूसरी सीट बेहद मामूली अंतर से एनडीए के खाते में गई थी। 2027 के चुनाव में सपा जहां अपनी जीत के सिलसिले को बरकरार रखना चाहेगी, वहीं भाजपा यहां वापसी करने के इरादे से पूरी ताकत झोंकती नजर आएगी।
चित्रकूट विधानसभा: सपा और भाजपा में रही है सीधी जंग
चित्रकूट विधानसभा सीट से वर्तमान में समाजवादी पार्टी के अनिल कुमार (अनिल प्रधान) विधायक हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को 20,876 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। इसके अलावा, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस विधानसभा क्षेत्र में सपा की मजबूत पकड़ नजर आई। लोकसभा चुनाव में यहां सपा को करीब 91,569 वोट मिले थे, जबकि बसपा और भाजपा लगभग बराबरी पर रहे।
सीट का इतिहास: साल 2012 के परिसीमन के बाद यह सीट ‘चित्रकूट’ नाम से अस्तित्व में आई, इससे पहले इसे कर्वी (Karwi) के नाम से जाना जाता था।
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1950-60 का दशक: कांग्रेस का दबदबा रहा।
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1970-90 का दशक: सीपीआई (CPI) काफी सक्रिय रही। राम सजीवन और राम प्रसाद सिंह जैसे नेताओं ने जीत दर्ज की।
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1990 से 2000 का दशक: बहुजन समाज पार्टी (BSP) का अच्छा प्रदर्शन रहा।
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2012 के बाद: मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच सिमट गया है। सपा ने 2012 और 2022 में जीत हासिल की, जबकि 2017 की मोदी लहर में यह सीट भाजपा के खाते में गई थी।
मानिकपुर विधानसभा: सिर्फ 1,048 वोटों से हारी थी सपा
मानिकपुर विधानसभा सीट पर वर्तमान में भाजपा के सहयोगी दल ‘अपना दल (सोनेलाल)’ का कब्जा है। यहां से अविनाश चंद्र द्विवेदी विधायक हैं। 2022 के बेहद रोमांचक चुनाव में उन्होंने सपा के वीर सिंह पटेल को मात्र 1,048 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। चूंकि अपना दल (एस) एनडीए का हिस्सा है, इसलिए यह सीट वर्तमान में सत्ताधारी गठबंधन के पास है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में इस खंड में सपा और बसपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी।
सीट का इतिहास: 2008 के परिसीमन से पहले मानिकपुर सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी, लेकिन बाद में इसे सामान्य कर दिया गया।
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1950-80 का दशक: कांग्रेस और जनसंघ का प्रभाव रहा।
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1990 का दशक: भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाई।
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1996 से 2012 तक: यह सीट बसपा का मजबूत गढ़ रही। बसपा नेता दद्दू प्रसाद ने यहां से लगातार तीन बार जीत दर्ज की।
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2017 के बाद: यह सीट भाजपा/एनडीए के कब्जे में आ गई। 2017 में भाजपा के आर.के. सिंह पटेल और 2019 के उपचुनाव में आनंद शुक्ला जीते।
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2022 का चुनाव: अपना दल (सोनेलाल) ने बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की।
2027 में क्या होगा? 2022 में हार-जीत का अंतर बेहद कम होने और हालिया लोकसभा चुनावों में सपा के पक्ष में दिखे रुझानों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मानिकपुर और चित्रकूट, दोनों ही सीटों पर बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

