मोदी-ट्रंप की फिर होगी बात? डील पर बचे मुद्दों को सुलझाने में जुटे दोनों देश

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

 भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौता (Trade Deal) अब अपने निर्णायक और अंतिम चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर ने पुष्टि की है कि दोनों देश समझौते के बाकी बचे प्रमुख मुद्दों को सुलझाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत जल्द एक बार फिर फोन पर बातचीत कर सकते हैं और वार्ता की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

जी20 बैठक के इतर सकारात्मक चर्चा

जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से इतर पत्रकारों से बात करते हुए जेमीसन ग्रीर ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते को मुकाम तक पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने उन प्रमुख बिंदुओं की पहचान कर ली है, जिन पर अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है।

ग्रीर ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई हालिया बैठक को बेहद सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि समझौते की औपचारिक घोषणा तत्काल होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तकनीकी और नीतिगत पहलुओं पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।

मोदी-ट्रंप के बीच फोन पर चर्चा और पीयूष गोयल की वार्ता

ग्रीर के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच गुरुवार सुबह व्यापार समेत कई रणनीतिक मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं के बीच जल्द ही एक और उच्चस्तरीय फोन कॉल होने की संभावना है, जिसमें समझौते की अंतिम रूपरेखा और आगे के कदमों पर चर्चा की जाएगी।

इससे पहले बुधवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के मिलवॉकी में जेमीसन ग्रीर से मुलाकात की थी। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना है। यह पूरी प्रक्रिया 7 फरवरी को जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में तय किए गए रोडमैप के तहत आगे बढ़ रही है।

2025 के तनाव और 50% टैरिफ के बाद पटरी पर लौटी बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता कई उतार-चढ़ावों से गुजरी है:

  • 2025 में तल्खी: साल 2025 में वार्ता अचानक रुक गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था। इसमें रूस से भारत की तेल खरीद के विरोध में लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था।

  • पुनर्बहाली: कूटनीतिक वार्ताओं के बाद गतिरोध टूटा और 7 फरवरी को एक नए समझौते की रूपरेखा सामने आई।

  • टैरिफ में कटौती का प्रस्ताव: राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि अमेरिका, भारत पर अपने पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा, बशर्ते भारत भी अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में रियायत दे।

प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले संतुलन चाहता है भारत

अमेरिकी टैरिफ नीति में बार-बार हुए बदलावों के कारण पहले चरण के समझौते को अंतिम रूप देने में वक्त लगा है। 24 सितंबर को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया था कि समझौता लगभग तैयार है, लेकिन इसे अंतिम रूप देने के लिए भारत अमेरिकी बाजार में निष्पक्ष और बराबरी का अवसर चाहता है। भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी बाजार में उसके निर्यातकों को आसियान (ASEAN) देशों, चीन और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले नुकसान न उठाना पड़े।