8 साल पुराने केस में चंद्रशेखर पर शिकंजा, संपत्ति कुर्की तक पहुंचा मामला

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। इसके साथ ही, अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सांसद की संपत्ति कुर्क (जब्त) करने का भी आदेश दिया है। यह मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज 8 साल पुराने एक मारपीट और धमकी के केस से जुड़ा है।

कोर्ट से फरार चल रहे थे चंद्रशेखर आजाद

दरअसल, चंद्रशेखर आजाद पर आरोप है कि वह लगातार अदालत की सुनवाई की अनदेखी कर रहे थे और कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए, जिसके चलते अदालत ने उन्हें फरार घोषित कर दिया।

शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार के वकील ने अदालत के सामने दलील दी थी कि चंद्रशेखर के खिलाफ पहले भी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वह सुनवाई से नदारद रहे। वकील ने मांग की थी कि सांसद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए और CrPC की धारा 82 (फरार व्यक्ति की उद्घोषणा) और धारा 83 (संपत्ति की कुर्की) के तहत कार्रवाई की जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद MP-MLA कोर्ट ने यह कड़ा आदेश पारित किया।

क्या है 2018 का ‘थप्पड़ कांड’?

यह पूरा विवाद साल 2018 का है, जब साहिबाबाद इलाके में एक शादी समारोह का आयोजन हुआ था। आरोप है कि चंद्रशेखर आजाद इस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे और उनके साथ आए समर्थक हथियारों से लैस थे।

उसी शादी में शामिल धर्मेंद्र कुमार नाम के एक व्यक्ति ने जब सांसद और उनके समर्थकों से पूछा कि वे शादी में इतने हथियार लेकर क्यों आए हैं, तो विवाद खड़ा हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद चंद्रशेखर आजाद और उनके लगभग 15 साथियों ने मिलकर धर्मेंद्र के साथ गाली-गलौज और बुरी तरह मारपीट की। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 305 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

अब इस मामले में कोर्ट के सख्त रुख के बाद नगीना सांसद की गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।