SIR में छूटे नामों पर EC का स्पेशल ड्राइव, 20 राज्यों में फिर जुड़ेंगे मतदाता

gyanesh kumar
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

मतदाता सूचियों (Voter List) से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों और विवादों के बीच, चुनाव आयोग (Election Commission) ने एक अहम फैसला लिया है। आयोग ने उन मतदाताओं को फिर से सूची में शामिल करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जो विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान किसी कारणवश सूची में शामिल होने से रह गए थे।

यह अभियान उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस अभियान के तहत पहली बार वोट देने वाले युवाओं और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को सूची में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा।

29 सितंबर को जारी हुआ निर्देश, अधिकारियों को दिए गए टास्क

चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को इस संबंध में लिखित निर्देश भेजे थे। इसके बाद गुरुवार को हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसे फिर से दोहराया गया।

आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां के सीईओ, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) लगातार मतदाता सूची अपडेट करने के लिए विशेष अभियान चलाएं। उप निर्वाचन आयुक्त ने अधिकारियों से कहा है कि वे SIR से पहले और बाद की मतदाता सूची का मिलान करें और उन लोगों की सूची तैयार करें जिनके नाम हटा दिए गए हैं। अधिकारियों को ऐसे लोगों के घर जाकर जानकारी जुटाने और पात्र लोगों से फॉर्म 6 (Form 6) भरवाने के निर्देश दिए गए हैं।

13 करोड़ नाम हटने के बाद आयोग पर उठे थे सवाल

यह फैसला उस समय आया है, जब 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के ड्राफ्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका और ECINet सिस्टम के केंद्रीकरण पर गंभीर सवाल उठ रहे थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वयं चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के नाम पर लिए गए ऐसे कई फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। इनमें Form 6 में बदलाव और ECINet का केंद्रीकृत नियंत्रण शामिल था।

फॉर्म 6 को लेकर स्थिति साफ, वापस लौटा पुराना नियम

इस विशेष अभियान में अब सामान्य वैधानिक Form 6 का ही इस्तेमाल किया जाएगा। SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 में जो एक अतिरिक्त और विवादास्पद सवाल (कि माता-पिता पिछली सूची में शामिल थे या नहीं) जोड़ा गया था, वह इस अभियान में लागू नहीं होगा। चुनाव आयुक्त संधू ने इस बदलाव को ‘अवैध’ तक कह दिया था। अब आयोग ने साफ कर दिया है कि यह अतिरिक्त घोषणा केवल SIR चरण के दौरान ही लागू थी।

महाराष्ट्र में जल्दबाजी में नाम नहीं हटाने की चेतावनी

महाराष्ट्र, जहां SIR की प्रक्रिया अभी भी जारी है, के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। राज्य की ड्राफ्ट सूची में 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के दायरे में हैं।

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से जल्दबाजी में न हटाया जाए। संबंधित व्यक्ति को अपने दस्तावेज पेश करने का पूरा मौका दिया जाएगा और व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाए बिना बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। महाराष्ट्र में मतदाताओं की सहायता के लिए 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे।