15 अक्टूबर से UPI चार्ज, Indian Bank दे सकता है व्यापारियों को राहत

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सैफी हुसैन
सैफी हुसैन

भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल हर वर्ग कर रहा है। फिलहाल ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री है, लेकिन 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट पेमेंट्स पर एमडीआर (MDR – Merchant Discount Rate) लागू होने वाला है। इस नए चार्ज को लेकर परेशान कारोबारियों के लिए सरकारी क्षेत्र के दिग्गज ‘इंडियन बैंक’ (Indian Bank) की ओर से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है।

इंडियन बैंक अपने हिस्से का MDR माफ करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बैंक के एमडी (MD) और सीईओ (CEO) बिनोद कुमार ने हाल ही में दिए एक बयान में इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं। अगर यह फैसला लागू होता है, तो इसका सीधा और बड़ा फायदा उन कारोबारियों को मिलेगा जो रोजाना बड़े अमाउंट के UPI मर्चेंट पेमेंट रिसीव करते हैं।

क्या होता है MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट)?

MDR वह चार्ज या फीस है जो डिजिटल या कार्ड पेमेंट स्वीकार करने पर मर्चेंट (दुकानदार/कारोबारी) की तरफ से पेमेंट सिस्टम से जुड़ी कंपनियों (जैसे- बैंक, पेमेंट गेटवे आदि) को दिया जाता है। नए नियमों के अनुसार:

  • 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा।

  • 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के बड़े ट्रांजेक्शन पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये तक सीमित (Cap) रहेगा।

  • छोटे कारोबारियों के लिए पहले की तरह ‘जीरो-MDR’ व्यवस्था लागू रहेगी।

इंडियन बैंक क्यों माफ कर सकता है अपना 0.28% हिस्सा?

कुल 0.4% MDR में से एक निश्चित हिस्सा उस बैंक को मिलता है, जिस बैंक का ग्राहक (Sender) होता है। इंडियन बैंक के मामले में, इस कुल चार्ज का लगभग 0.28% हिस्सा बैंक के खाते में जाना है।

सीईओ बिनोद कुमार ने स्पष्ट किया है कि बैंक इस 0.28% वाले हिस्से को माफ करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि भले ही बैंक फिलहाल UPI ट्रांजेक्शन से सीधे तौर पर कोई कमाई नहीं कर रहा है, लेकिन UPI के व्यापक इस्तेमाल से बैंक को कस्टमर इंगेजमेंट और अन्य डिजिटल सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से काफी फायदा हुआ है।

5000 रुपये के पेमेंट पर ऐसे समझें गणित: उदाहरण के लिए, यदि किसी कारोबारी को 5000 रुपये का कोई ऐसा UPI पेमेंट मिलता है जिस पर 0.4% MDR लागू है, तो कुल MDR 20 रुपये बनेगा। इस 20 रुपये में से 0.28% यानी 14 रुपये ग्राहक के बैंक (जैसे इंडियन बैंक) को जाने हैं। अगर बैंक यह चार्ज माफ करता है, तो मर्चेंट को सीधा फायदा होगा।

इंडियन बैंक के UPI ट्रांजेक्शन के आंकड़े

बैंक के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में इंडियन बैंक के नेटवर्क पर लगभग 32.6 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन हुए हैं। इनमें से करीब 1.6 करोड़ (लगभग 5%) ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से ज्यादा के थे। 30 सितंबर 2026 तक बैंक के पास करीब 21.2 लाख P2M (व्यक्ति से मर्चेंट) और 8.2 लाख P2PM (व्यक्ति से छोटे मर्चेंट) पंजीकृत थे।

क्या दूसरे बैंक भी दिखाएंगे यह दरियादिली?

फिलहाल, इंडियन बैंक ने अपने हिस्से को माफ करने पर केवल ‘विचार’ करने की बात कही है। बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे। यदि इंडियन बैंक यह कदम उठाता है, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा के चलते अन्य बड़े बैंकों पर भी अपने हिस्से का MDR कम या पूरी तरह माफ करने का दबाव बढ़ सकता है, जिससे देशभर के लाखों कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।