यासीन मलिक का ऐलान: मुकदमा नहीं लड़ूंगा, फांसी दे दो

तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रतिबंधित आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। 1990 के चर्चित सरला भट्ट हत्याकांड मामले में उसने ऐलान किया है कि वह अब मुकदमे में अपना बचाव नहीं करेगा और उसने खुद के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की है। इसके साथ ही, मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मुल्लिक को तलाक देने का भी फैसला किया है।
अदालत में पेश किया 25 पन्नों का लिखित बयान
साल 2019 से तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक ने अपने वकील अबू आदिल पंडित के जरिए श्रीनगर की अतिरिक्त जिला कोर्ट में 25 पन्नों का हलफनामा पेश किया है। इसे उसने अपना आखिरी बयान बताया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर तय की है।
हलफनामे में मलिक ने कहा है कि उसने इस्तखारा की नमाज (अल्लाह से मार्गदर्शन मांगने की दुआ) पढ़ने और अपनी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मुकदमा न लड़ने का फैसला लिया है। हालांकि, उसने यह भी साफ किया है कि इस फैसले को उसका अपराध स्वीकार करना या अभियोजन पक्ष के आरोपों को मानना न समझा जाए। उसने खुद को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा करते हुए भी ‘मृत्युदंड’ की मांग की है।
बता दें कि मई 2022 में टेरर-फंडिंग मामले में दोषी ठहराए जाने के दौरान भी उसने इसी तरह बचाव करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। NIA अब इस सजा को फांसी में बदलने की मांग कर रही है।
पाकिस्तानी पत्नी मुशाल से तोड़ा 16 साल का रिश्ता
इसी हलफनामे के जरिए यासीन ने पाकिस्तानी कार्यकर्ता मुशाल हुसैन मुल्लिक के साथ अपने 16 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने की घोषणा की है। दोनों का निकाह 2009 में हुआ था और उनकी 13 साल की एक बेटी रजिया सुल्ताना है। मुशाल 2023 से 2025 तक पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार में मानवाधिकार मामलों की विशेष सलाहकार भी रह चुकी है।
मलिक ने लिखा कि पिछले 8 सालों से उसे जेल से अपनी पत्नी या परिवार से फोन और वीडियो कॉल पर बात करने की इजाजत नहीं मिली। पत्नी को लिखे एक भावुक खत में उसने कहा, “मैं नहीं चाहता कि मुशाल अपना पूरा जीवन इस स्थिति के बोझ तले या विधवा की तरह जिए। मैं चाहता हूं कि वह गरिमा के साथ अपना नया जीवन शुरू करे।” इसके साथ ही, उसने अपनी बेटी रजिया सुल्ताना से अपील की है कि वह अपनी दादी और मां का ख्याल रखे।
क्या है 1990 का सरला भट्ट हत्याकांड?
घाटी में जब आतंकवाद अपने चरम पर था, तब अप्रैल 1990 में श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान में काम करने वाली कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट का आतंकियों ने अपहरण कर लिया था। कुछ दिनों बाद उनका शव बरामद हुआ था। इस निर्मम हत्या ने कश्मीरी पंडित समुदाय में खौफ पैदा कर दिया था।
तीन दशक तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद, साल 2025 में राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने इस मामले को दोबारा खोला और चार्जशीट दायर की। इस चार्जशीट में यासीन मलिक, खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम थे। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है और एक फरार है, जिसके चलते यासीन मलिक ही इस मामले का मुख्य जीवित आरोपी बचा है।
