राजस्थान निकाय चुनाव नतीजे: 10 में से 8 नगर निगमों में BJP का दबदबा

bhajanlal sharma
अजमल शाह
अजमल शाह

राजस्थान में पहली बार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए शहरी निकाय चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। राज्य के 10 बड़े नगर निगमों में से आठ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) बोर्ड बनाने की स्थिति में आ गई है। युवाओं के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद हुए इस पहले बड़े चुनाव में राज्य के करीब 1.44 करोड़ शहरी मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें लगभग 15 फीसदी हिस्सेदारी 18-25 साल के युवाओं की थी।

सियासत में ‘काका जी’ के रूप में उभरे सीएम भजनलाल

नतीजों के बाद बीजेपी कार्यालय में जीत का जश्न मनाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीधे कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस वाले कहते थे कि आपके काका जी भी वन स्टेट, वन इलेक्शन नहीं करवा सकते। अब किसने सफलतापूर्वक करवा दिया? आपके काका जी ने।”

राजस्थान की सियासत में नेताओं और जनता के जुड़ाव वाले संबोधनों (जैसे भैरों सिंह शेखावत के लिए ‘बाबोसा’, अशोक गहलोत के लिए ‘जादूगर’ और वसुंधरा राजे के लिए ‘रानी’) की पुरानी परंपरा रही है। अपने इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने खुद को चुनाव के केंद्र में रखकर पार्टी के भीतर फैसले लेने वाले ‘काका जी’ के रूप में स्थापित किया है।

जोधपुर में फंसा पेंच, दांव पर दिग्गजों की साख

प्रदेश के 10 में से आठ नगर निगमों में बीजेपी बोर्ड बनाने जा रही है। पार्टी को जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बढ़त मिली है। अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि पाली और भरतपुर में वह निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाएगी।

जोधपुर नगर निगम में दिलचस्प और कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों 44-44 सीटों पर बराबरी पर आ गई हैं। अब 10 निर्दलीय और एक आरएलपी (RLP) पार्षद का रुख तय करेगा कि शहर की कमान किसके हाथ में जाएगी। जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दोनों की राजनीतिक साख और रणनीतिक कौशल दांव पर लगा है।

आंकड़ों में दिखी करीबी टक्कर, वोट शेयर का अंतर 1% से कम

बीजेपी के शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस चुनाव को पंचायत चुनाव से पहले का सेमीफाइनल बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने यह हाफ-ईयरली एग्जाम फर्स्ट डिवीजन (60 फीसदी प्रदर्शन) से पास किया है।

हालांकि, पूरे राज्य के आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस भी बहुत पीछे नहीं है। प्रदेश के कुल 10,245 वार्डों में हुए मतदान में बीजेपी ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्डों में जीत दर्ज की है। निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों के खाते में 2,273 वार्ड गए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने बारां जिले में एंट्री करते हुए 42 वार्डों में जीत हासिल की है।

वोट शेयर के मामले में भी दोनों प्रमुख दलों के बीच फासला सिमट गया है। 309 स्थानीय निकायों में बीजेपी को 37.35 लाख और कांग्रेस को 36.35 लाख वोट मिले। दोनों के बीच सिर्फ 99,615 वोटों (करीब 0.94 फीसदी) का अंतर है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भी वोटों का अंतर 99,615 ही था, लेकिन तब यह प्रतिशत में करीब 2.16 फीसदी था।

कांग्रेस ने परिसीमन पर उठाए सवाल

इन नतीजों पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “बीजेपी को जश्न मनाने दीजिए। परिसीमन बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था। हम एक हजार से ज्यादा वार्ड और आसानी से जीत सकते थे।”

राजस्थान की करीब 27.84 फीसदी आबादी शहरी निकायों में आती है। राज्य की बाकी 70 फीसदी ग्रामीण आबादी अगले चरण में होने वाले पंचायत चुनावों के जरिए अपना जनादेश देगी।