जन्माष्टमी पर 40,000 करोड़ का कारोबार! सनातन इकोनॉमी की ताकत

देशभर में शुक्रवार को मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर इस साल बाजारों में बंपर खरीदारी देखने को मिल रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के ताजा अनुमानों के अनुसार, त्योहारी मांग और धार्मिक पर्यटन में उछाल के चलते इस बार 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की संभावना है। व्यापारिक संगठन ने इसे केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि देश की ‘सनातन इकोनॉमी’ की ताकत और आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र बताया है।
बाजारों में रौनक और स्वदेशी वस्तुओं की मांग
लॉन्ग वीकेंड होने के कारण मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा और दिल्ली-मुंबई समेत भगवान कृष्ण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बाजारों में लड्डू गोपाल की मूर्तियों, माखन-मिश्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, मोर-मुकुट और विशेष परिधानों की भारी मांग है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, रक्षाबंधन के बाद अब जन्माष्टमी की खरीदारी से स्थानीय व्यापार और कुटीर उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” आह्वान का असर त्योहारी बाजार में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां उपभोक्ता बड़ी संख्या में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उपभोक्ता खर्च का अनुमानित आंकड़ा
व्यापारिक संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली संभावित बिक्री और धार्मिक पर्यटन पर खर्च का एक विस्तृत आकलन जारी किया है:
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मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद: 20%
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धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन व अन्य सेवाएं: 15%
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फूल, मालाएं और सजावट सामग्री: 12%
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पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत किट: 10%
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पारंपरिक परिधान और वस्त्र: 10%
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फल, सूखे मेवे और प्रसाद: 10%
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अन्य उपभोक्ता वस्तुएं: 10%
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लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार: 8%
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उपहार, खिलौने और घरेलू सजावट: 5%
अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा तंत्र
खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान लाखों लोगों की आजीविका का साधन है। इस त्योहारी मांग से किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार और ट्रांसपोर्टर से लेकर होटल व रेस्तरां संचालक सीधे तौर पर लाभान्वित होते हैं। भारतीय त्योहारों की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इनमें होने वाला खर्च केवल उपभोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों तक आय और रोजगार के रूप में पहुंचता है।
पिछले वर्षों के मुकाबले 30 फीसदी का उछाल
व्यापारिक आंकड़ों के लिहाज से पिछले दो वर्षों में जन्माष्टमी के कारोबार में लगातार और मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। कैट की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में इस पर्व पर देशभर में करीब 25,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस वर्ष उपभोक्ता मांग, आधुनिक रिटेल और डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए व्यापार में सीधे 30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
