नेपाल बाढ़ में तबाही का खौफनाक मंजर, दुबई से मदद को पहुंचे रमेश श्रेष्ठ

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 26 अगस्त को त्रिशूली और रसुवा क्षेत्रों में आई बाढ़ के बाद देश-विदेश से मदद के हाथ आगे बढ़ रहे हैं। दुबई में रहने वाले 46 वर्षीय नेपाली प्रवासी रमेश श्रेष्ठ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत अभियान चलाया।
रमेश पिछले 18 साल से दुबई में रह रहे हैं और वे नेपाल एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष तथा नॉन-रेजिडेंट नेपाली एसोसिएशन (NRNA) के मध्य पूर्व अध्यक्ष हैं। बाढ़ के समय वे काम के सिलसिले में नेपाल में ही थे। खबर मिलने के बाद उन्होंने काठमांडू में NRNA की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और 35-40 लोगों की टीम के साथ सीधे प्रभावित इलाकों का रुख किया।
ग्राउंड जीरो पर खौफनाक मंजर और चुनौतियां
त्रिशूली नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित समुदायों के बीच दो दिन बिताने के बाद श्रेष्ठ ने स्थिति को बेहद दर्दनाक बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और वीडियो में जो तस्वीरें देखी गई थीं, जमीनी हकीकत उससे कहीं ज्यादा भयावह और शब्दों में बयान न की जा सकने वाली थी।
राहत दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक पहुंचना था। बाढ़ के कारण सड़कें टूट गई थीं और परिवहन के सभी रास्ते बंद हो गए थे। कई इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था, जबकि कुछ जगहों पर लापता लोगों की तलाश जारी थी। बिजली और संचार सेवाएं पूरी तरह ठप होने के कारण बचाव कार्य और भी मुश्किल हो गया था।
300 परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया
NRNA की टीम 27 अगस्त की सुबह तीन ट्रकों में राहत सामग्री लेकर नुवाकोट के त्रिशूली पहुंची थी। इस दल में NRNA नेताओं के साथ-साथ एक मेडिकल टीम भी शामिल थी, जो जरूरी दवाइयां लेकर गई थी।
दल ने प्रभावित क्षेत्रों में टेंट, गद्दे और भोजन सामग्री का वितरण किया। इस अभियान के तहत लगभग 300 प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री दी गई। इसके अलावा, अन्य 300 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें से कई लोगों को नेपाल आर्मी के बैरक और एक आयुर्वेदिक अस्पताल व स्कूल के पास शरण दी गई। रमेश श्रेष्ठ ने व्यक्तिगत रूप से भी राहत कार्यों के लिए 5,11,111 नेपाली रुपये (लगभग 12,364 दिरहम) का योगदान दिया है।
त्रासदी से मिला सबक: अर्ली वार्निंग सिस्टम की जरूरत
बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद श्रेष्ठ ने आपदा प्रबंधन को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपदा आने के बाद राहत कार्य जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा अहम उससे पहले की तैयारियां हैं।
श्रेष्ठ के मुताबिक, देश को मजबूत ‘अर्ली-वार्निंग सिस्टम’ (पूर्व चेतावनी प्रणाली), बेहतर निकासी योजना, प्रशिक्षित आपातकालीन टीमों और तत्काल उपयोग के लिए आवश्यक भोजन, दवा और आश्रय की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय हर एक मिनट कीमती होता है। सरकार, स्थानीय समुदायों और संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
UAE सरकार और नेपाली समुदाय का समर्थन
इस संकट की घड़ी में नेपाली समुदाय और प्रवासी संगठन लगातार मदद के लिए आगे आ रहे हैं। रमेश श्रेष्ठ का अपना घर गंडकी प्रांत के स्यांग्जा जिले (भीरकोट नगर पालिका-8) में है, जो बाढ़ से सुरक्षित रहा। परिवार के सुरक्षित होने के बावजूद त्रासदी के पैमाने ने उन्हें विचलित कर दिया।
श्रेष्ठ ने इस मुश्किल समय में नेपाल का साथ देने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यूएई सरकार और वहां के लोगों द्वारा दी गई मानवीय सहायता और एकजुटता के लिए नेपाल हमेशा आभारी रहेगा। राहत अभियान के दौरान श्रेष्ठ के साथ गए अन्य नेपाली प्रवासियों ने भी प्रभावित क्षेत्रों में मदद का सिलसिला जारी रखा है।
