जिस पर दुनिया में कोई गोली चलाने की हिम्मत नहीं करता, हमने उसे निशाना बनाया

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सैयद सरवर हुसैन- कंट्री हेड ईरान
सैयद सरवर हुसैन- कंट्री हेड ईरान

ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने दोनों सैन्य शाखाओं के बीच अटूट एकता की घोषणा करते हुए कहा है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायली सेना के खिलाफ सफलतापूर्वक जवाबी कार्रवाई की है। तेहरान स्थित सेना मुख्यालय में आयोजित एक समन्वय बैठक के दौरान ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमी-निया ने जोर देकर कहा कि जिन ताकतों का मुकाबला करने की हिम्मत दुनिया का कोई देश नहीं जुटा पाता, ईरान उनके सामने डटकर खड़ा हुआ है।

अकरमी-निया ने कहा, “हम ऐसे दुश्मनों के खिलाफ खड़े हैं जिनके पास भारी मात्रा में उन्नत तकनीक और हथियार हैं। दुनिया का कोई भी देश उन पर एक गोली चलाने की हिम्मत नहीं करता, लेकिन हम उनके सामने खड़े हुए, उन पर हमले किए और उन्हें अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया।”

सेना और IRGC में मीडिया व ऑपरेशनल तालमेल पर जोर

तेहरान में आयोजित इस समन्वय बैठक की मेजबानी सेना के प्रवक्ता अकरमी-निया ने की, जिसमें IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों सुरक्षा बलों के बीच मीडिया सहयोग को मजबूत करना और मौजूदा सैन्य टकराव के बीच संयुक्त ऑपरेशनल तालमेल को प्रदर्शित करना था।

ब्रिगेडियर जनरल मोहेब्बी ने ईरानी सेना को राष्ट्रीय गौरव बताते हुए इसे एक मजबूत, लोकप्रिय और साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ डटी रहने वाली संस्था करार दिया। उन्होंने 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध (जिसे ईरान में ‘प्रथम पवित्र रक्षा’ कहा जाता है) की तुलना मौजूदा टकराव से करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ दूसरे और तीसरे चरण के संघर्ष में भी सेना ने अपनी भूमिका मजबूती से निभाई है।

हमलों से अमेरिकी ठिकानों को नुकसान, हथियारों की किल्लत

इस बैठक में पेंटागन के उन आकलनों का भी संदर्भ दिया गया, जिनमें माना गया है कि ईरानी हमलों ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर स्थित सैकड़ों इमारतों और ढांचों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट कर दिया है। इन निरंतर हमलों की वजह से अमेरिकी सेना को प्रमुख हथियारों और गोला-बारूद की कमी का भी सामना करना पड़ा है।

मोहेब्बी ने कहा कि सेना, आईआरजीसी, सरकार और जनता के बीच की इस एकजुटता को इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के भीतर फूट डालने की विरोधी ताकतों की उम्मीदें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।

‘फूट डालने की मनोवैज्ञानिक रणनीति नाकाम’

अकरमी-निया ने कहा कि सर्वोच्च नेतृत्व के तहत स्थापित एकीकृत कमान ढांचे ने वाशिंगटन के मनोवैज्ञानिक युद्ध को निष्प्रभावी कर दिया है। उनके मुताबिक, विरोधी ताकतों को उम्मीद थी कि वे देश के भीतर दरार पैदा कर लेंगे, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कायम एकजुटता ने उन्हें गतिरोध (Stalemate) की स्थिति में ला खड़ा किया है।

फरवरी के अंत से शुरू हुए सीधे सैन्य टकराव के बाद से ईरानी सशस्त्र बलों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और नौसैनिक संपत्तियों पर कई जवाबी हमले किए हैं। इस दौरान सेना और आईआरजीसी ने मिलकर अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसके साथ ही ईरानी वायु रक्षा इकाइयों ने कई उन्नत अमेरिकी ड्रोन मार गिराए हैं, जबकि नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कड़ी निगरानी लागू कर अनधिकृत जहाजों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं।