यमन के हमलों से सऊदी परेशान क्यों? इजरायल-ब्रिटेन से मांगी मदद

यमन के सशस्त्र बलों की ओर से सऊदी अरब पर किए जा रहे लगातार ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। यमन से मिल रही कड़ी सैन्य चुनौती से निपटने के लिए सऊदी अरब और इजरायल के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की मध्यस्थता में उच्चस्तरीय बातचीत की खबर सामने आई है। इजरायली अंग्रेजी दैनिक द जेरूसलम पोस्ट ने क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि रियाद और तेल अवीव के प्रतिनिधियों ने सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने और खुफिया तालमेल बढ़ाने के उद्देश्य से यह चर्चा की है।
सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब का मुख्य जोर इजरायल से व्यापक खुफिया इनपुट हासिल करने पर है, ताकि क्षेत्र में यमनी सेना की सैन्य तैनाती और उनकी आगामी रणनीतिक योजनाओं की सटीक जानकारी जुटाई जा सके।
अमेरिका ने किया इनकार, ब्रिटेन से मांगी सैन्य मदद
अमेरिकी समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने यमनी सेना को बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य से पीछे धकेलने और अपने प्रमुख तेल बुनियादी ढांचे को हवाई हमलों से बचाने के लिए ब्रिटेन से भी मदद मांगी है। यह कदम तब उठाया गया जब वाशिंगटन ने रियाद की सीधी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम सऊदी अरब की सहायता के लिए ब्रिटिश सैन्य सलाहकार भेजने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन उन्होंने किसी अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई या बड़े सहयोग को लेकर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
किंग खालिद एयरबेस पर यमन का बड़ा हमला
सऊदी अरब की यह बेचैनी पिछले एक सप्ताह के दौरान यमनी सेना द्वारा तेज किए गए जवाबी हमलों के बाद बढ़ी है। यमन ने सऊदी अरब के खमीस मुशायत शहर के पास स्थित रणनीतिक ‘किंग खालिद एयरबेस’ पर एक बड़ा और प्रभावी सैन्य अभियान चलाया।
यमनी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी के अनुसार, सोमवार को स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकू ड्रोनों की मदद से एयरबेस के भीतर सैन्य प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे, एयरक्राफ्ट हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और हथियारों के डिपो सहित कई ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।
बाब अल-मंदाब पर यमनी सेना का नियंत्रण
हालिया घटनाक्रमों में यमनी सशस्त्र बलों ने पेरीम द्वीप (अरबी में मय्यून द्वीप) पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के केंद्र में स्थित होने के कारण यह द्वीप एक अहम निगरानी स्थल माना जाता है। इस नियंत्रण के साथ ही पूरे जलमार्ग पर सना समर्थित सेना का दबदबा स्थापित हो गया है।
यमन के पश्चिमी तट पर सऊदी समर्थित गुटों के साथ तेज हुई झड़पों के बीच इस नए सैन्य नियंत्रण ने पश्चिमी मोर्चे पर ताकत का संतुलन बदल दिया है। इसके जवाब में सऊदी अरब भी यमनी ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर लगातार हवाई हमले कर रहा है, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव गहरा गया है।
