ट्रंप के दबाव में दक्षिण कोरिया का फैसला, होर्मुज के पास बढ़ेगी सैन्य मौजूदगी

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच दक्षिण कोरिया ने एक अहम कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को ऐलान किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास वाले जलक्षेत्र में समुद्री गश्ती विमान और विस्फोटक आयुध निपटान (Explosive Ordnance Disposal – EOD) टीम की तैनाती करेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दक्षिण कोरिया ने यह स्पष्ट किया है कि वह ईरान युद्ध में किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप के लिए अपने सैनिक नहीं भेज रहा है। इसके बजाय, यह कदम दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक के जरिए होने वाले कमर्शियल शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।
चोंघे नेवल यूनिट का होगा विस्तार
रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि सरकार अपनी ‘चोंघे’ (Cheonghae) एंटी-पायरेसी नेवल यूनिट के ‘ऑपरेशनल एरिया’ का विस्तार करने की योजना बना रही है। यह यूनिट फिलहाल सोमालिया के तट पर अदन की खाड़ी में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा करती है। अब इसके दायरे को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास के जलक्षेत्र तक बढ़ाया जाएगा।
योनहाप (Yonhap) समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चोंघे यूनिट की मौजूदा तैनाती को इस साल के अंत तक के लिए ही अधिकृत किया गया है। इसके कार्यकाल और तैनाती के विस्तार के लिए संसदीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।
‘सैन्य हस्तक्षेप नहीं, नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा लक्ष्य’
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर संवाददाताओं को बताया कि चोंघे यूनिट के मिशन को बढ़ाने का मकसद दक्षिण कोरियाई नागरिकों की रक्षा करना और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखना है। अधिकारी के मुताबिक, यह तैनाती पूरी तरह से गैर-लड़ाकू (non-combat) उद्देश्यों के लिए है और यह यूनिट मित्र देशों की सेनाओं से स्वतंत्र होकर अपना काम करेगी।
ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए मिशन की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से तय कर दी गई हैं। अधिकारी ने बताया कि यूनिट के ऑपरेशन केवल ओमान के दक्षिण में खुले समुद्र तक ही सीमित रहेंगे। इसके अलावा, समुद्री गश्ती विमानों को अपने मिशन के दौरान ईरानी क्षेत्र, वहां के जलक्षेत्र या होर्मुज जलडमरूमध्य के आंतरिक हिस्से की निगरानी करने या उन्हें निशाना बनाने की सख्त मनाही होगी।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग का रुख और ईरान की चेतावनी
दक्षिण कोरिया का यह कदम देश के उस घोषित रुख के अनुरूप है, जिसमें युद्ध से दूरी बनाए रखने की बात कही गई थी। सितंबर में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा था कि उनका देश ऐसे किसी भी रूप में सेना तैनात नहीं करेगा जिससे सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति पैदा हो। उन्होंने स्पष्ट किया था, “हमने अब तक युद्ध में शामिल न होने और हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत को बनाए रखा है और हम आगे भी इसका पालन करते रहेंगे।”
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले आवागमन को बुरी तरह बाधित किया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। इससे पहले, जब सियोल ने इस जलमार्ग की सुरक्षा में योगदान देने पर विचार करने की बात कही थी, तब तेहरान ने दक्षिण कोरिया को इस तरह की किसी भी तैनाती के खिलाफ चेतावनी दी थी।

