पंजाब के डेरों से संपर्क, यूपी में संगठन विस्तार, जानिए RSS का चुनावी प्लान

अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी जमीन पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस का मुख्य ध्यान राजनीतिक रूप से अहम उत्तर प्रदेश और पंजाब पर केंद्रित है और पिछले कुछ महीनों से इन दोनों राज्यों के लिए विशेष रणनीति पर काम चल रहा है।
नवंबर के पहले सप्ताह में इंदौर में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में चुनाव से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें विपक्ष द्वारा जोर-शोर से उठाया जा रहा ‘वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का मुद्दा और पंजाब में ड्रग्स की समस्या प्रमुख हैं।
SIR विवाद पर RSS की रणनीति: ‘विपक्ष का ही होगा नुकसान’
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर RSS ने अपना रुख साफ कर दिया है। आरएसएस सूत्रों के अनुसार, SIR का जमीन पर कोई खास असर नहीं है और यह आम लोगों का मुद्दा नहीं बन पाया है।
संघ के एक नेता के अनुसार, “13 करोड़ लोगों के नाम कटने की बात की जा रही है, लेकिन इससे केवल तीन करोड़ लोग ही प्रभावित हुए हैं। बाकी नाम वे हैं जिनका या तो पता बदल गया है या जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। प्रभावित 3 करोड़ लोगों को भी नाम दोबारा जुड़वाने का मौका दिया जा रहा है।” इस नेता ने दावा किया कि अगर विपक्ष उत्तर प्रदेश में SIR को बड़ा मुद्दा बनाता है, तो इससे उसी का नुकसान होगा, क्योंकि इससे असल जन-मुद्दों से ध्यान भटक जाएगा।
यूपी में BJP की ‘हैट्रिक’ के लिए पूरी ताकत झोंकेगा संघ
संघ नेताओं के अनुसार, उत्तर प्रदेश में संगठन की स्थिति बहुत मजबूत है। अपने शताब्दी वर्ष में आरएसएस ने देश के इस सबसे बड़े राज्य में शाखाओं की संख्या बढ़ाई है और जमीनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में आरएसएस राज्य में बीजेपी की हैट्रिक सुनिश्चित करने के लिए अपने अभियान में पूरी ताकत लगाएगा।
पंजाब में बढ़ी RSS की सक्रियता, डेरों से संपर्क
दूसरी ओर, पंजाब में भी आरएसएस पिछले सात महीनों से काफी सक्रिय हुआ है। संघ की टीम वहां विभिन्न डेरों के संपर्क में है ताकि उन्हें भरोसे में लिया जा सके। साथ ही, गैर सरकारी संगठनों (NGO) और स्थानीय लोगों के बीच भी पहुंच बढ़ाई जा रही है। पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या पर भी आरएसएस का खास फोकस है। इंदौर की बैठक में विदेशी दखल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
RSS में होने जा रहे बड़े बदलाव: खत्म होगी ‘प्रांत’ व्यवस्था
2 से 4 नवंबर को इंदौर में होने वाली कार्यकारी मंडल की बैठक संगठन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद आरएसएस के भीतर बड़े ढांचागत बदलाव होंगे:
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अगले साल से आरएसएस अपनी पुरानी ‘प्रांत’ व्यवस्था को समाप्त कर रहा है। इसकी जगह ‘संभाग संरचना’ लागू की जाएगी।
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जिलों की संख्या मौजूदा 924 से बढ़ाकर 1500-1600 की जा सकती है।
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मौजूदा 46 प्रांतों के स्थान पर करीब 90 संभाग बनाए जाएंगे।
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11 क्षेत्रों की जगह 9 क्षेत्र होंगे। प्रांत प्रचारक की जगह अब ‘राज्य प्रचारक’ और ‘राज्य कार्यवाह’ का पद होगा।
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अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक अब हर साल के बजाय तीन साल में एक बार होगी।
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आरएसएस के सरकार्यवाह का चुनाव भी अगले साल होना है, जिसके बाद सह सरकार्यवाहों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
संघ के एक नेता के अनुसार, इस नई संगठन रचना का मुख्य उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण करना है। साथ ही, संघ अपने ढांचे को राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप ढालना चाहता है ताकि बेहतर तालमेल बन सके।

