पीएम मोदी ने खोला पुणे के लिए मेट्रो का नया रास्ता, पिंक लाइन का उद्घाटन

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे में हजारों करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से शहर के पुराने और नए इलाकों के बीच संपर्क मजबूत होगा और पुणे के विकास को नई रफ्तार मिलेगी। प्रधानमंत्री ने हिंजेवाड़ी से शिवाजीनगर के बीच शुरू हुई मेट्रो सेवा को शहर के आईटी क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताया। इस दौरान उन्होंने गरीबी उन्मूलन और देश के विकास पर जोर देते हुए कहा कि ’50 करोड़ लोगों ने गरीबी रेखा को पार किया है, पहले पैसा भाई-भतीजावाद पर जाता था।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की कई पीढ़ियां ‘गरीबी हटाओ’ के नारों और वादों के बीच बड़ी हुई हैं। पहले गरीबी के खिलाफ लड़ाई सिर्फ भाषणों तक सीमित थी, लेकिन आज भारत जमीन पर गरीबी को परास्त कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ गरीबी कम करने वाले अग्रणी देशों में भी शामिल है। पुणे के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह शहर हमेशा से ऐसे विचारों का केंद्र रहा है, जिसने देश को नई दिशा दी है। आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मा, स्टार्टअप और विनिर्माण के क्षेत्र में पुणे की भूमिका बेहद अहम है।

21,800 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री ने करीब 21,800 करोड़ रुपये की पुणे मेट्रो परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार 23 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन (पिंक लाइन) का उद्घाटन शामिल है। यह लाइन मान से जिला न्यायालय मेट्रो स्टेशन तक जाएगी और हिंजेवाड़ी के आईटी हब को सीधे शिवाजीनगर से जोड़ेगी। इस लाइन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संचालन पूरी तरह महिला ट्रेन ऑपरेटर करेंगी, और इसकी करीब 30 प्रतिशत बिजली की जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी की जाएगी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने पुणे मेट्रो के दूसरे चरण की चार नई लाइनों का भी शिलान्यास किया। करीब 13,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में लाइन 2ए, 2बी, 4 और 4ए शामिल हैं, जो वनाज, चांदनी चौक, रामवाड़ी, विठ्ठलवाड़ी, खराड़ी, खड़कवासला और माणिक बाग जैसे प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ेंगी।

12 साल में देश के मेट्रो नेटवर्क में ऐतिहासिक विस्तार

मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पहली मेट्रो 1984 में चली थी, लेकिन उसके बाद के 30 वर्षों में केवल 248 किलोमीटर मेट्रो लाइन का निर्माण हुआ था और 2014 तक यह सुविधा सिर्फ पांच शहरों तक सीमित थी। उन्होंने कहा कि यदि पुरानी कार्यशैली जारी रहती, तो पुणे तक मेट्रो पहुंचने में कई दशक और लग जाते।

वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में जो मेट्रो नेटवर्क 248 किलोमीटर था, वह अब बढ़कर करीब 1,400 किलोमीटर हो गया है। पहले यह सिर्फ 5 शहरों में थी, जो अब बढ़कर 26 शहरों तक पहुंच चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक लोग मेट्रो से सफर कर रहे हैं और भारत का मेट्रो नेटवर्क दुनिया के शीर्ष तीन नेटवर्क्स में शुमार है।

शहरों की प्रतिस्पर्धा और छोटे शहरों के विकास पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी शहर की पहचान उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता और वहां जीवन की सुगमता (Ease of Living) से होती है। केंद्र सरकार ने 2014 के बाद से शहरी मध्यम वर्ग के जीवन और परिवहन को आसान बनाने का जो संकल्प लिया था, आज वह धरातल पर दिखाई दे रहा है। सरकार का आगामी लक्ष्य देश के छोटे शहरों को भी विकास के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिसके लिए शहरी चुनौती कोष के जरिए बड़े पैमाने पर निवेश और सहायता जुटाई जा रही है।