सियासत में बिष्णुपुर क्यों अहम? 6 सीटों के 2022 नतीजों से समझिए तस्वीर

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Lee Chang (North East Expert)
Lee Chang (North East Expert)

करीब एक साल तक चले राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी 2026 में मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ और इसके साथ ही राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इंफाल घाटी से सटा बिष्णुपुर (Bishnupur) जिला राज्य की सत्ता तय करने में हमेशा से केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है। घाटी और पहाड़ी इलाकों की सीमा पर स्थित यह जिला जातीय तनाव के बाद उपजे सामाजिक और सुरक्षा हालात के मद्देनजर आगामी चुनाव में बेहद संवेदनशील और निर्णायक साबित होने वाला है।

जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना

2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बिष्णुपुर जिले की कुल आबादी लगभग 2 लाख 37 हजार है, जिसमें पुरुष और महिला आबादी लगभग 1 लाख 19 हजार-1 लाख 19 हजार के बराबर अनुपात में है।

  • लिंगानुपात: जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 999 महिलाएं दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है।

  • साक्षरता: जिले की कुल साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत है (पुरुष साक्षरता 88% और महिला साक्षरता 71%)।

  • शहरी-ग्रामीण विभाजन: लगभग 63 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 37 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में निवास करती है।

  • धार्मिक व जातीय संरचना: जिले में मुख्य रूप से हिंदू (करीब 74%) और सनामही धर्म (मैतेई पारंपरिक धर्म – करीब 16%) के अनुयायी रहते हैं। इसके अलावा मुस्लिम समुदाय (जिन्हें स्थानीय स्तर पर मैतेई पंगल कहा जाता है) की आबादी लगभग 8 प्रतिशत और ईसाइयों की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है। जिले में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 9 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी लगभग 1 प्रतिशत दर्ज है।

सभी 6 सीटें सामान्य, कोई भी सीट आरक्षित नहीं

बिष्णुपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं: नांबोल, ओइनम, बिष्णुपुर, मोइरांग, थंगा और कुम्बी। मैतेई बहुल घाटी क्षेत्र में स्थित होने और आदिवासी आबादी के बेहद सीमित होने के कारण ये सभी छह सीटें सामान्य (General) श्रेणी में आती हैं; यहां कोई भी सीट एससी या एसटी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है।

2022 का जनादेश: सत्तारूढ़ गठबंधन की क्लीन स्वीप

2022 के विधानसभा चुनाव में बिष्णुपुर जिले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। जिले की सभी छह सीटों पर एनडीए गठबंधन (भाजपा और एनपीपी) का कब्जा रहा था:

  1. नांबोल: भाजपा के थौनाओजम बसंत कुमार सिंह ने जीत दर्ज की।

  2. ओइनम: नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की इरेंगबाम नलिनी देवी विजयी रहीं।

  3. बिष्णुपुर: भाजपा के कोंथौजम गोविंदास सिंह ने जेडीयू के ओइनम नबकिशोर सिंह को कड़े मुकाबले में (46% बनाम 41% वोट शेयर) हराया।

  4. मोइरांग: एनपीपी के थोंगम शांति सिंह ने जीत हासिल की।

  5. थंगा: चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए तोंगब्रम रोबिंद्रो सिंह करीब 12,531 वोटों के साथ विजयी रहे।

  6. कुम्बी: भाजपा के सानासाम प्रेमचंद्र सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार अहांथेम शानजॉय सिंह को महज 372 वोटों के बेहद नजदीकी अंतर से हराया, जो जिले की सबसे करीबी चुनावी टक्कर थी।

सियासी इतिहास: कांग्रेस के दौर से भाजपा के वर्चस्व तक

मणिपुर की राजनीति में 1970 और 1980 के दशक में कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा था। इसके बाद ‘मणिपुर पीपल्स पार्टी’ (MPP) जैसे क्षेत्रीय दलों के उभार ने बिष्णुपुर की राजनीति को प्रभावित किया। वर्ष 2000 के बाद ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने लगातार 15 वर्षों तक शासन किया।

हालांकि, 2017 में भाजपा की पहली सरकार बनने के साथ ही बिष्णुपुर जिले का मिजाज पूरी तरह बदल गया और यह इलाका भाजपा व सहयोगी एनपीपी का मजबूत गढ़ बनकर उभरा।

राष्ट्रपति शासन के बाद नई सरकार और 2027 की चुनौतियां

मई 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद राजनीतिक समीकरणों में भारी उलटफेर हुआ।

  • फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जो लगभग एक साल तक चला।

  • फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटाकर भाजपा के वरिष्ठ नेता यमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया, साथ ही सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए दो उपमुख्यमंत्री भी नियुक्त किए गए।

आगामी 2027 के चुनाव में बिष्णुपुर जिले में शांति बहाली, विस्थापितों का पुनर्वास, आजीविका और सामाजिक सौहार्द सबसे बड़े चुनावी मुद्दे होंगे। भाजपा और एनपीपी जहां अपनी साख बचाने की जद्दोजहद में हैं, वहीं कांग्रेस जमीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जीवित करने के प्रयास में जुटी है।

कुम्बी सीट का कानूनी विवाद

जिले की कुम्बी सीट वर्तमान में कानूनी उलझनों के कारण रिक्त पड़ी है। 2022 में भाजपा प्रत्याशी की 372 वोटों की संकीर्ण जीत के खिलाफ जेडीयू उम्मीदवार ने चुनाव याचिका दायर की थी। मणिपुर उच्च न्यायालय ने अगस्त 2023 में चुनाव परिणाम को लेकर फैसला सुनाया, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा। इसके चलते यह सीट खाली है और 2027 के चुनाव में यहां बेहद दिलचस्प मुकाबला होने के आसार हैं।

सीट-वार प्रभाव और सामाजिक समीकरण

  • नांबोल: मैतेई समुदाय का स्पष्ट वर्चस्व; व्यापारिक और कृषक वर्ग चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • ओइनम: मैतेई हिंदू और सनामही समुदाय का मिला-जुला प्रभाव; स्थानीय पारंपरिक राजनीतिक घरानों की मजबूत पकड़ मानी जाती है।

  • बिष्णुपुर: मैतेई समुदाय बहुसंख्यक है; सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक निर्णयों पर गहरा प्रभाव रहता है।

  • मोइरांग: मैतेई समुदाय के साथ-साथ चोथे जैसे छोटे जनजातीय समूहों की मौजूदगी इस सीट को रणनीतिक रूप से अहम बनाती है।

  • थंगा: लोकतक झील के किनारे स्थित होने के कारण यहां मछुआरा समुदाय और मैतेई वर्ग का वोट बैंक निर्णायक साबित होता है।

  • कुम्बी: मैतेई हिंदू और मुस्लिम (मैतेई पंगल) समुदाय की साझा आबादी यहां की चुनावी दिशा तय करती है।