BJP में टिकट के लिए पैरवी से ज्यादा चलेगा फीडबैक, पुराने चेहरों पर नजर?

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी कमर कस ली है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से सबक लेते हुए, पार्टी अब कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस बार टिकट बंटवारे में किसी भी नेता का दबाव या आपसी टकराव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केवल जिताऊ उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा जाएगा, जिसके लिए सर्वे को आधार बनाया जाएगा।

100 से अधिक विधायकों पर गिर सकती है गाज

जानकारी के अनुसार, सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) का सामना कर रहे विधायकों के साथ इस बार कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। वर्तमान में बीजेपी के 255 विधायकों में से 100 से अधिक के टिकट काटे जाने की संभावना है। लगातार कई बार से जीत रहे विधायकों के प्रदर्शन की भी बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

युवाओं और महिलाओं पर होगा फोकस

पार्टी इस बार युवाओं और महिलाओं को बड़ी संख्या में चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। टिकट वितरण में आपसी सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भीतरघात की आशंका को खत्म किया जा सके।

2024 के लोकसभा चुनाव से लिया सबक

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 49.6% से गिरकर 41.4% पर आ गया था और सीटें 62 से घटकर 36 रह गई थीं। पार्टी का मानना है कि अति-आत्मविश्वास और टिकट बंटवारे में शीर्ष नेताओं के आपसी टकराव का नुकसान उठाना पड़ा था। पिछले चुनाव में 49 सांसदों को दोबारा टिकट दिया गया था, जिनमें से 27 हार गए थे। यहां तक कि कई केंद्रीय मंत्री भी चुनाव हार गए थे।

खामियों को दूर करने की कवायद तेज

पिछले दो सालों में बीजेपी ने अपनी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास किया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राज्य भर का दौरा कर कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार मंडलों का दौरा कर रहे हैं। बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन किया गया है और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जनजागरण अभियान चलाए जा रहे हैं।

बीजेपी जानती है कि उत्तर प्रदेश जैसे अपने गढ़ में लगातार दूसरी हार से विपक्ष को संजीवनी मिल सकती है। इसलिए, पार्टी सत्ता में हैट्रिक लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।