जालौन में एक सीट पर सपा, दो पर बीजेपी की जीत, 27 में क्या बदलेगा?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाना जाने वाला जालौन जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, बेतवा-यमुना नदियों, हस्तनिर्मित कागज उद्योग और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी खासा दखल रखता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर जिले की तीनों विधानसभा सीटों—माधौगढ़, कालपी और उरई (आरक्षित)—पर अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है।

जिले का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां का राजनीतिक मिजाज समय के साथ बदलता रहा है। 2012 में तीनों सीटें सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच बंटी थीं। 2017 में बीजेपी ने सभी तीन सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया। इसके बाद 2022 के चुनाव में समीकरण फिर बदले, जहां बीजेपी दो सीटें (माधौगढ़ और उरई) बचाने में कामयाब रही, वहीं कालपी सीट पर समाजवादी पार्टी ने बेहद करीबी मुकाबले में कब्जा जमा लिया।

जालौन जिले की आबादी और सामाजिक ताना-बाना

जालौन की कुल आबादी लगभग 16.90 लाख दर्ज है, जिसमें 54 प्रतिशत पुरुष और 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। जिले की सामाजिक और भौगोलिक संरचना चुनावी नतीजों को गहराई से प्रभावित करती है:

  • ग्रामीण बनाम शहरी: जिले की लगभग 75 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है, जबकि 25 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है।

  • सामाजिक संरचना: कुल आबादी में अनुसूचित जाति (SC) की हिस्सेदारी लगभग 27.7 प्रतिशत है। धार्मिक आधार पर करीब 89.3 प्रतिशत हिंदू और 10.2 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। जिले की साक्षरता दर लगभग 73 प्रतिशत है।

इस जनसांख्यिकी के चलते ग्रामीण इलाकों में सिंचाई, खेती, ग्रामीण संपर्क मार्ग और सरकारी योजनाओं की पहुंच मुख्य चुनावी मुद्दे बनते हैं, जबकि शहरी इलाकों में नागरिक सुविधाएं और रोजगार अहम रहते हैं।

2022 का चुनावी रिपोर्ट कार्ड: तीनों सीटों का गणित

2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीनों सीटों पर अलग-अलग चुनावी समीकरण देखने को मिले थे:

विधानसभा सीट प्रमुख उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट वोट शेयर
माधौगढ़ मूलचंद्र सिंह BJP 1,05,231 41.29%
शीतल कुशवाहा BSP 70,257 27.57%
राघवेंद्र प्रताप सिंह SP 63,0xx* 24.74%
कालपी विनोद चतुर्वेदी SP 69,782 29.48%
छोटे सिंह निषाद पार्टी 66,966 28.29%
श्यामपाल उर्फ चुन्ना पाल BSP 64,683 27.32%
उरई (SC) गौरी शंकर BJP 1,28,644 47.45%
दयाशंकर वर्मा SP 90,996 33.56%
सत्येंद्र प्रताप BSP 38,638 14.25%

1. माधौगढ़ सीट: बीजेपी के सामने हैट्रिक की चुनौती

2012 में बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई माधौगढ़ सीट पर 2017 और 2022 में बीजेपी के मूलचंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने बसपा की शीतल कुशवाहा को 34,974 वोटों के बड़े अंतर से हराया। बड़े ग्रामीण आधार वाली इस सीट पर 2027 में बीजेपी के सामने अपनी जीत का सिलसिला बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि सपा और बसपा की नजरें पिछड़ी और दलित जातियों के वोटों को लामबंद कर बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने पर टिकी हैं।

2. कालपी सीट: त्रिकोणीय संघर्ष और वोटों के बिखराव का केंद्र

महर्षि वेदव्यास की जन्मस्थली और ऐतिहासिक 84 गुंबद के लिए प्रसिद्ध कालपी का राजनीतिक मुकाबला बेहद पेचीदा रहा है। 2022 में सपा के विनोद चतुर्वेदी ने निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को महज 2,816 वोटों के अंतर से हराया था। यहां तीसरे नंबर पर रहे बसपा उम्मीदवार श्यामपाल पाल को भी 64,683 वोट मिले थे। किसी भी उम्मीदवार को 30 प्रतिशत वोट नहीं मिले, जो यह साबित करता है कि यहां वोटों का त्रिकोणीय बिखराव सीधे परिणाम तय करता है। 2027 में सपा के सामने अपनी सीट बचाने का दबाव रहेगा, जबकि एनडीए गठबंधन सीट पर वापसी के लिए नए समीकरण साधने की कोशिश करेगा।

3. उरई (SC) सीट: बीजेपी की मजबूत पकड़ और विपक्ष की घेराबंदी

जिला मुख्यालय उरई सुरक्षित सीट पर ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का अनुपात लगभग बराबर है। 2022 में बीजेपी के गौरी शंकर ने सपा के दयाशंकर वर्मा को 37,648 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर 47.45 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। इस सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाताओं का रुझान और स्थानीय विकास के मुद्दे सबसे अहम माने जाते हैं। 2027 में विपक्ष के लिए बीजेपी के इस मजबूत किले में सेंध लगाना बड़ी चुनौती होगी।

2027 के रण में निर्णायक साबित होंगे ये मुद्दे

जालौन जिले में 2027 की चुनावी लड़ाई मुख्य रूप से चार धुरियों पर केंद्रित रहने की संभावना है:

  • ग्रामीण और किसान मतदाता: जिले की 75 फीसदी ग्रामीण आबादी के चलते बेतवा-यमुना से जुड़ी नहरों की सिंचाई व्यवस्था, खाद-बीज की उपलब्धता और ग्रामीण सड़कों की स्थिति प्राथमिकता में रहेगी।

  • विपक्षी मतों का ध्रुवीकरण: कालपी सीट के नतीजे साफ बताते हैं कि जहां विपक्ष के वोट बंटे, वहां मुकाबला बेहद नजदीकी हो गया। 2027 में गठबंधन और वोटों का एकीकरण निर्णायक भूमिका निभाएगा।

  • स्थानीय उम्मीदवारों का प्रभाव: माधौगढ़ और उरई के अंतर बताते हैं कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि और जनता से सीधा संवाद पार्टी के कैडर वोट में बड़ा इजाफा करता है।

  • स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचा: कालपी के हस्तनिर्मित कागज उद्योग को प्रोत्साहन और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मतदाताओं की प्राथमिकताओं को तय करेंगे।