कैसी है Bird of Paradise, जिम्मेदारियों से आगे खुशी तलाशती महिला

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

हांगकांग की नई फैमिली ड्रामा फिल्म ‘बर्ड ऑफ पैराडाइज’ (Bird of Paradise) एक ऐसी 46 वर्षीय महिला की कहानी पेश करती है, जो अपने परिवार की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से ऊब चुकी है। लेखिका-निर्देशक जॉय वू चुई-यी (Joey Wu Chui-yi) के निर्देशन में बनी यह पहली फीचर फिल्म है। कहानी में नया मोड़ तब आता है जब मुख्य किरदार अपनी कुकिंग और क्लीनिंग की थकाऊ रूटीन को तोड़कर पोल डांसिंग क्लास जॉइन कर लेती है। पारिवारिक नोकझोंक और लाइट-हार्टेड ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह एक अच्छी फिल्म है, लेकिन गंभीर सिनेमा के शौकीनों को यह थोड़ी सतही लग सकती है।

एक हाउसवाइफ की अपनी पहचान की तलाश

फिल्म में मुख्य भूमिका कैथरीन चाऊ का-यी (Catherine Chau Ka-yee) ने निभाई है, जो उनके करियर के लिए एक दुर्लभ लीड रोल है। वह 46 वर्षीय यूएन (Yuen) का किरदार निभा रही हैं। यूएन एक ऐसी निराश हाउसवाइफ है जिसने अपना पूरा जीवन अपने टीनेज बेटे हैंग (Jayden Cheung Dik-man) और अपने रूढ़िवादी पति मिंग-लाम (Peter Chan Charm-man) के लिए समर्पित कर दिया है।

यूएन की जिंदगी पति की नासमझी और रोज सुबह उसके बताए नाश्ते के सख्त रूटीन के बीच बंधी हुई है। यह अनुशासन तब टूटता है जब वह एक दोस्त के जिम में पोल-डांसिंग कोर्स के लिए साइन अप कर लेती है। यहां से वह अपनी साफ-सुथरी लेकिन नीरस दुनिया से बाहर निकलकर एक नई जिंदगी का अनुभव करती है।

संयोग और उलझती कहानी

फिल्म का मुख्य प्लॉट एक बड़े संयोग पर टिका है। शान (Yeung Nga-man) नाम की लड़की हैंग की क्लासमेट है और हैंग उसे पसंद भी करता है। दूसरी तरफ, यूएन का पति मिंग-लाम उसी स्कूल में टीचर और अनुशासन प्रमुख है। मिंग-लाम शान को उसकी बालियों और छोटी स्कर्ट की वजह से एक प्रॉब्लम स्टूडेंट मानता है।

संयोग से, यही शान पोल-डांसिंग क्लास में यूएन की सबसे अच्छी दोस्त बन जाती है। इस कनेक्शन के कारण यूएन अपने बेटे के भी करीब आती है और उसे रोमांटिक सलाह देती है। दूसरी ओर, शान ही वह जरिया बनती है जिससे मिंग-लाम को अपनी पत्नी के इस नए शौक के बारे में पता चलता है और वह इसका विरोध करता है।

किरदार और निर्देशन की कमजोरियां

‘बर्ड ऑफ पैराडाइज’ में कई मीठे और मनोरंजक पल हैं, लेकिन कहानी में कोई बड़ा सरप्राइज नहीं है। फिल्म का ड्रामा बहुत ही लो-स्टेक (low stakes) पर निर्भर करता है और कोई भी टकराव लंबे समय तक नहीं चलता। फिल्म में यूएन अपनी 70 वर्षीय मां (Elaine Jin Yan-ling) से अपनी भावनात्मक जरूरतों को प्राथमिकता देने की प्रेरणा लेती है, जो आज भी अपनी जिंदगी पूरी आजादी से जीती हैं।

फिल्म में मिड-लाइफ क्राइसिस को जिस गहराई से दिखाया जाना चाहिए था, उसकी कमी खलती है। जानकारों के मुताबिक, यह सतहीपन शायद युवा निर्देशक के इस विषय पर अनुभव की कमी को दर्शाता है। मिंग-लाम का किरदार काफी उबाऊ और रूढ़िवादी है। फिल्म के अंत में उसके विचारों में अचानक आया बदलाव दर्शकों को विश्वसनीय नहीं लगता।

कैथरीन चाऊ का शानदार प्रदर्शन

स्क्रिप्ट की तमाम कमजोरियों के बावजूद, कैथरीन चाऊ का स्वाभाविक आकर्षण इस फिल्म को देखने लायक बनाता है। लंबे समय तक सहायक भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ने के बाद, कैथरीन को एक मुख्य भूमिका में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए देखना दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव है। इसके अलावा, फिल्म के पोल-डांसिंग सीक्वेंस को भी कैमरे पर बेहद खूबसूरती से कैद किया गया है।