‘हमला करके बच नहीं पाएंगे’, अमेरिका को ईरान का सख्त संदेश, बढ़ा तनाव

ईरान ने अमेरिका और इजरायल (जियोनिस्ट शासन) की ओर से किसी भी आक्रामकता या हत्या की कोशिशों का कड़ा जवाब देने का ‘अंतिम फैसला’ कर लिया है। एक ईरानी सुरक्षा सूत्र ने बताया कि यह जवाबी कार्रवाई “बिना किसी सीमा या संयम” के होगी। सूत्र के मुताबिक, ईरानी सशस्त्र बल क्षेत्र में मौजूद हमलावरों और उनके समर्थकों के ठिकानों को पूरी ताकत से तबाह करने के लिए तैयार हैं।
‘अकेले हमला करने की बात एक कड़वा मजाक’
सुरक्षा सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका बिना इजरायल के और इजरायल बिना अमेरिका के ईरान पर हमला नहीं करेगा। किसी भी एक शासन द्वारा स्वतंत्र रूप से युद्ध छेड़ने की बात को उन्होंने “कड़वे मजाक” की तरह बताया। सूत्र का कहना है कि अमेरिका और इजरायल की युद्ध मशीनरी आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों की खुली धमकियों ने ही ईरान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का कानूनी और नैतिक अधिकार दिया है।
बातचीत और युद्धविराम के लिए ईरान की शर्तें
ईरानी सैन्य कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका को सख्त संदेश दिए हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि जब तक वाशिंगटन विश्वास बहाली के कदम नहीं उठाता, तब तक अमेरिका के साथ “कोई बातचीत नहीं होगी।” रेजाई के मुताबिक, इस प्रक्रिया की शुरुआत ईरान की सभी शर्तों को पूरा करने से होनी चाहिए।
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ स्थायी युद्धविराम तभी संभव है, जब वाशिंगटन तेहरान की सात शर्तों को माने। मंगलवार को तेहरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ बैठक के दौरान कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका अपनी गलत गणनाओं और युद्ध के कारण खुद दलदल में फंस गया है, और अब बाहर निकलने के लिए उसे ही जरूरी कदम उठाने होंगे।
इस्लामाबाद समझौता और होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण
पिछले साल जून और इस साल फरवरी में थोपे गए युद्धों के बाद से ही क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। जून में ईरानी और अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बीच 14 सूत्रीय ‘इस्लामाबाद समझौता’ (Islamabad MoU) हुआ था।
इस समझौते के तहत वाशिंगटन को सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने और ईरान पर लगे प्रतिबंध व नाकेबंदी को हटाना है। इसके बदले में तेहरान को रणनीतिक रूप से अहम ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को धीरे-धीरे फिर से खोलना है। मार्च में अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता के शुरुआती दिनों में ही ईरान ने इस अहम खाड़ी जलमार्ग को अपने नियंत्रण में ले लिया था। अब अमेरिका और इजरायल, दोनों देशों में आने वाले हफ्तों में चुनाव होने हैं, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य हलचल लगातार तेज बनी हुई है।

