साकेत कोर्ट के जज पर टिप्पणी भारी? CJP की रत्ना सिंह पर कंटेंप्ट की तैयारी

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह की कानूनी मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। दिल्ली सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल अमोल सिन्हा ने साकेत कोर्ट के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणियों का संज्ञान लिया है। इसके आधार पर रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेंप्ट) की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दे दी गई है।

क्या था पूरा मामला और टिप्पणी?

जानकारी के मुताबिक, सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साकेत कोर्ट के एक जज को लेकर टिप्पणी की थी। अपनी पोस्ट में उन्होंने जज पर किसी ‘आका’ के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया था।

कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश पर इस तरह की टिप्पणी प्रथम दृष्टया (पहली नजर में) न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने और आपराधिक अवमानना के दायरे में आती है।

धारा 15(2) के तहत मिली मंजूरी

इस मामले में वकील कौशिक चटर्जी ने एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल से अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया था। इसी आग्रह पर संज्ञान लेते हुए ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ (Contempt of Courts Act, 1971) की धारा 15(2) के तहत यह सहमति प्रदान की गई है।

अब इस वैधानिक मंजूरी के बाद, रत्ना सिंह के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में आधिकारिक रूप से आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अगर इस मामले में दोष साबित होता है, तो उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।