बारिश में योग करते हैं तो इन गलतियों से रहें सावधान, बढ़ सकती है परेशानी

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अपूर्वा त्रिपाठी
अपूर्वा त्रिपाठी (योग एक्सपर्ट)

बारिश का मौसम आते ही सुबह की ठंडी हवा, बादलों से घिरा आसमान और तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर को बाकी दिनों से अलग तरीके से प्रभावित करने लगते हैं। ऐसे मौसम में योग शरीर को सक्रिय रखने का अच्छा तरीका हो सकता है, लेकिन मानसून में योग का मतलब सिर्फ मैट बिछाकर आसन शुरू कर देना नहीं है। हवा में नमी, फिसलन, बंद कमरों की उमस और बारिश के कारण बदलती दिनचर्या ऐसी कई स्थितियां पैदा कर सकती हैं, जिनमें गलत तरीके से किया गया अभ्यास फायदे के बजाय परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में योग करते समय कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

जगह का चुनाव सबसे पहले

मानसून में योग की शुरुआत आसन से नहीं, बल्कि जगह चुनने से होती है। जिस फर्श पर अभ्यास किया जा रहा है, वह पूरी तरह सूखा और स्थिर होना चाहिए। बारिश के कारण फर्श पर आई नमी या पानी योग मैट को भी अस्थिर कर सकता है। खासकर ऐसे आसनों में जिनमें शरीर का संतुलन पैरों पर निर्भर करता है, फिसलने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए योग के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी हो, फर्श सूखा हो और शरीर को स्वतंत्र रूप से हिलाने-डुलाने की जगह मिले।

अगर कमरे में उमस बहुत ज्यादा है तो खिड़की या दरवाजा खोलकर प्राकृतिक वेंटिलेशन बनाए रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि तेज बारिश, बिजली गिरने या बाहर असुरक्षित मौसम की स्थिति में खुले स्थान पर योग करने के बजाय घर के भीतर सुरक्षित जगह चुननी चाहिए।

शरीर को सीधे कठिन आसनों में न झोंकें

मानसून में सुबह का मौसम ठंडा या नम हो सकता है और लंबे समय तक बैठे रहने या कम शारीरिक गतिविधि के कारण शरीर पहले से थोड़ा जकड़ा हुआ महसूस हो सकता है। ऐसे में सीधे कठिन आसन, गहरे स्ट्रेच या लंबे समय तक किसी मुद्रा में टिकने की कोशिश करने के बजाय हल्के वार्म-अप से शुरुआत करना बेहतर है।

गर्दन, कंधे, कलाई, कमर, घुटनों और टखनों की हल्की मूवमेंट के बाद अभ्यास को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य शरीर को अचानक खिंचाव देने के बजाय उसे अभ्यास के लिए तैयार करना है। योग में जल्दबाजी का कोई फायदा नहीं है; खासकर तब जब मौसम के कारण शरीर का अनुभव सामान्य दिनों से अलग हो।

आसान आसनों से शुरुआत करें

मानसून में शुरुआती या सामान्य स्तर के अभ्यास के लिए ताड़ासन, बालासन, वज्रासन, मार्जरी आसन और भुजंगासन जैसे अपेक्षाकृत सरल आसनों को अपनी क्षमता के अनुसार शामिल किया जा सकता है। इनका चुनाव व्यक्ति की उम्र, फिटनेस, लचीलापन और किसी मौजूदा शारीरिक समस्या के आधार पर होना चाहिए।

योग का लक्ष्य हर दिन कठिन से कठिन आसन करना नहीं है। सही अभ्यास वह है जिसमें शरीर पर अनावश्यक दबाव डाले बिना सांस, मुद्रा और मूवमेंट के बीच संतुलन बना रहे। यदि किसी आसन में दर्द या असहजता महसूस हो तो केवल इसलिए उसे जारी नहीं रखना चाहिए कि वह अभ्यास का हिस्सा है।

प्राणायाम में भी संयम जरूरी

बारिश के मौसम में कई लोग प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। सामान्य, नियंत्रित श्वास अभ्यास और नाड़ी शोधन जैसे अभ्यास व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार कर सकता है, लेकिन सांस को लंबे समय तक रोकने या बहुत तेज गति से श्वास लेने वाले कठिन अभ्यास बिना उचित मार्गदर्शन के नहीं करने चाहिए।

सांस से जुड़े अभ्यासों में सबसे महत्वपूर्ण बात तकनीक और आराम है। अगर अभ्यास करते समय चक्कर, बेचैनी, सांस लेने में कठिनाई या असामान्य असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए। केवल अधिक देर तक प्राणायाम करने को बेहतर अभ्यास मानना सही नहीं है।

बारिश में भीगकर तुरंत योग न करें

मानसून में यह गलती आसानी से हो जाती है। बाहर से भीगकर आने के तुरंत बाद मैट पर बैठ जाना या योग शुरू कर देना उचित नहीं है। पहले गीले कपड़े बदलें, शरीर को सामान्य तापमान पर आने दें और फिर अभ्यास करें। इसी तरह अगर बारिश के कारण शरीर ठंडा महसूस कर रहा हो तो सीधे कठिन स्ट्रेचिंग शुरू करने के बजाय हल्की गतिविधियों से शुरुआत करना बेहतर है।

योग के लिए आरामदायक और शरीर को स्वतंत्र रूप से मूव करने वाले कपड़े पहनना भी जरूरी है। बहुत गीले या असुविधाजनक कपड़ों में किया गया अभ्यास ध्यान और शरीर दोनों को प्रभावित कर सकता है।

खाने के तुरंत बाद मैट पर न जाएं

योग का समय आपकी दिनचर्या पर निर्भर कर सकता है, लेकिन भारी भोजन के तुरंत बाद अभ्यास करने से बचना चाहिए। भरे पेट कई आसन असहज महसूस हो सकते हैं और कुछ मुद्राओं में पेट पर दबाव भी पड़ सकता है। इसलिए अभ्यास और भोजन के बीच पर्याप्त अंतर रखना सामान्य तौर पर अधिक आरामदायक रहता है।

इसी तरह पानी पीना जरूरी है, लेकिन अभ्यास से ठीक पहले बहुत अधिक पानी पीने के बजाय दिनभर पर्याप्त मात्रा में तरल लेते रहना बेहतर है। मानसून में प्यास कम महसूस हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं है।

उमस को हल्के में न लें

मानसून में तापमान बहुत अधिक न होने के बावजूद हवा में नमी ज्यादा हो सकती है। इसका असर शरीर के पसीने को वाष्पित करने की क्षमता पर पड़ता है और लंबे या बहुत तीव्र अभ्यास के दौरान शरीर को गर्मी महसूस हो सकती है। इसलिए कमरे की स्थिति के अनुसार अभ्यास की तीव्रता तय करना जरूरी है।

अगर सामान्य योग सत्र के दौरान ही अत्यधिक थकान, कमजोरी, चक्कर या असामान्य सांस फूलने जैसा महसूस हो तो अभ्यास रोक देना चाहिए। मौसम के अनुरूप अपनी क्षमता को समझना किसी भी फिटनेस रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किन अभ्यासों में ज्यादा सावधानी

मानसून के दौरान सबसे ज्यादा सावधानी उन आसनों में रखनी चाहिए जिनमें संतुलन, तेज मूवमेंट या शरीर पर अचानक भार डालना शामिल हो। फिसलन वाले फर्श पर कठिन बैलेंसिंग आसन विशेष रूप से जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसी तरह अगर व्यक्ति लंबे समय से योग नहीं कर रहा है तो अचानक बहुत कठिन अभ्यास शुरू करना भी सही तरीका नहीं है।

यह भी याद रखना जरूरी है कि किसी दूसरे व्यक्ति का योग रूटीन आपके शरीर के लिए जरूरी नहीं कि उतना ही उपयुक्त हो। उम्र, फिटनेस स्तर, पुराने चोटिल हिस्से, जोड़ों की स्थिति और अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियां अभ्यास को प्रभावित कर सकती हैं।

शरीर की सुनना सबसे जरूरी

योग में “ज्यादा” हमेशा “बेहतर” नहीं होता। किसी आसन में खिंचाव महसूस होना और दर्द होना दो अलग चीजें हैं। अगर शरीर लगातार संकेत दे रहा है कि कोई मुद्रा ठीक नहीं लग रही, तो उसे जबरदस्ती करने के बजाय अभ्यास को रोकना या आसान विकल्प चुनना ज्यादा समझदारी है।

खासकर जिन लोगों को पहले से कोई चिकित्सकीय समस्या है, हाल में चोट लगी है, गर्भावस्था है या लंबे समय से शारीरिक गतिविधि नहीं की है, उन्हें अपने लिए उपयुक्त योग अभ्यास तय करने से पहले योग्य चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

मानसून में योग का सही मंत्र

बारिश के मौसम में योग का उद्देश्य शरीर को चुनौती देकर थका देना नहीं, बल्कि नियमित और सुरक्षित तरीके से सक्रिय रखना होना चाहिए। सूखी जगह, हल्का वार्म-अप, अपनी क्षमता के अनुरूप आसन, नियंत्रित श्वास, पर्याप्त आराम और शरीर के संकेतों पर ध्यान—ये छोटी बातें पूरे अभ्यास को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

मानसून में मौसम बदलता है, शरीर का अनुभव बदलता है और दिनचर्या भी बदल सकती है। इसलिए योग की सबसे अच्छी रणनीति यही है कि अभ्यास को मौसम के अनुसार ढाला जाए, मौसम को अभ्यास के हिसाब से नहीं। अगर शरीर आराम से साथ दे रहा है तो धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं, लेकिन दर्द, चक्कर या असामान्य थकान को नजरअंदाज करके सिर्फ रूटीन पूरा करने की कोशिश न करें।