Acidity की दवा खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, बदल गया बिक्री का नियम

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

अगर आप भी एसिडिटी (Acidity) होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाकर अपनी मर्जी से दवा खरीद लेते हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक प्रमुख दवा की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब मेडिकल स्टोर्स बिना डॉक्टर की वैध पर्ची (Prescription) के एसिडिटी की दवा नहीं दे सकेंगे।

वोनोप्राजान (Vonoprazan) दवा पर सख्ती

CDSCO ने स्पष्ट शर्त रखी है कि एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘वोनोप्राजान’ (Vonoprazan) की बिक्री अब केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही की जाएगी।

  • भारत में 10 और 20 मिलीग्राम की क्षमता वाली यह दवा पहले से स्वीकृत है।

  • अब निर्देश दिया गया है कि इसकी बिक्री के लिए, विशेषकर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट और आंतों से जुड़े रोगों के विशेषज्ञ) की पर्ची अनिवार्य होगी।

  • इस दवा के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर आगे भी क्लीनिकल टेस्ट (Clinical Test) करने की बात कही गई है।

लंबे समय तक दवा लेने के नुकसान

CDSCO के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार एसिडिटी होती है और वह लंबे समय तक खुद से दवाएं ले रहा है, तो इसके मूल कारण (Root Cause) का पता लगाना बेहद जरूरी है। एसिडिटी की कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने से शरीर में विटामिन B12 और मैग्नीशियम की कमी हो सकती है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर मरीज को ये साइड इफेक्ट्स हों, लेकिन अगर रोजाना दवा लेने की नौबत आ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना अनिवार्य है।

अन्य बीमारियों की नई दवाओं पर भी चल रहे हैं टेस्ट

CDSCO की बैठक में एसिडिटी के अलावा कई अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं और उनके क्लीनिकल ट्रायल्स को लेकर भी अहम सिफारिशें की गई हैं:

  • फैटी लिवर का इलाज: फैटी लिवर (Fatty Liver) के मरीजों के लिए एफ्रुक्सिफर्मिन और रेसमेटिरोम नाम की नई दवाओं के तीसरे चरण के परीक्षण (Phase 3 Trial) को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यह उन मरीजों के लिए है जिनके लिवर में फैट के साथ सूजन आ जाती है।

  • कब्ज और पेट दर्द (IBS-C): लंबे समय से कब्ज और पेट दर्द (IBS-C) की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए ‘लिनाक्लोटाइड’ दवा के 72 और 145 माइक्रोग्राम वाले रूप को मंजूरी देने की सिफारिश की गई है। वहीं, गंभीर मामलों के लिए 290 माइक्रोग्राम वाली दवा पर टेस्ट की बात सामने आई है।

  • सिकल सेल बीमारी: सिकल सेल (Sickle Cell) बीमारी के इलाज से जुड़ी ‘एटावोपिवाट’ नाम की दवा के तीसरे चरण के परीक्षण में अब 6 से 12 साल के बच्चों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है, ताकि बच्चों पर इसकी सुरक्षा और असर की जांच की जा सके।