‘Goa First’ में दरार? विजय कांग्रेस को साथ लाने पर अड़े, AAP नाराज

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

गोवा विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बने गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी तीसरे मोर्चे ‘गोवा फर्स्ट’ के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के बीच कुछ ही हफ्ते पहले हुए इस गठबंधन में दरार साफ दिखने लगी है। गठबंधन के भविष्य पर यह संकट GFP अध्यक्ष और फतोर्दा से विधायक विजय सरदेसाई के बदलते राजनीतिक रुख के बाद खड़ा हुआ है।

सरदेसाई अब मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को चुनौती देने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को मिलाकर एक बड़ा ‘महागठबंधन’ बनाने की वकालत कर रहे हैं। इस बदले घटनाक्रम के बीच पूरे राज्य से ‘गोवा फर्स्ट’ के वे बैनर हटा दिए गए हैं, जिनमें बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस पर भी तीखे हमले किए गए थे।

‘जनता महागठबंधन चाहती है’: विजय सरदेसाई

कांग्रेस को साथ लाने की वकालत करते हुए विजय सरदेसाई ने कहा कि राजनीति में मतदाता ही राजा होता है और गोवा का वोटर एक व्यापक महागठबंधन चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ऐसा गठबंधन होना चाहिए जिसमें बीजेपी का विरोध करने वाले सभी दल शामिल हों। सरदेसाई का मानना है कि ऐसे में मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) को सीधे तौर पर निशाना बनाना जनता को पसंद नहीं आ रहा है।

सूत्रों का कहना है कि सरदेसाई के इस बदले रुख के पीछे उनके अपने विधानसभा क्षेत्र फतोर्दा के सियासी समीकरण भी हैं। तीन बार के विधायक सरदेसाई को डर है कि तीसरे मोर्चे से चुनाव लड़ने पर उन्हें बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में नुकसान उठाना पड़ सकता है, खासकर तब जब पूर्व विधायक और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दामोदर ‘दामू’ नाइक उनके खिलाफ ताल ठोकने की तैयारी में हैं और कांग्रेस भी ईसाई-मुस्लिम बहुल इस सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है।

‘बीजेपी-कांग्रेस की संयुक्त कंपनी’: AAP का पलटवार

सरदेसाई के इस रुख पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। गोवा AAP के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि ‘गोवा फर्स्ट’ की नींव ही गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी विकल्प के तौर पर रखी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में “बीजेपी-कांग्रेस की संयुक्त कंपनी ने मिलकर गोवा को बर्बाद किया है।” नाइक ने सरदेसाई को दो टूक कहा कि वे तय करें कि वे “बीजेपी-कांग्रेस की संयुक्त कंपनी के साथ खड़े हैं या गोवा की जनता के साथ।”

वहीं, बेनाउलिम से AAP विधायक वेन्जी विएगास ने कांग्रेस की ‘गोय राखोन यात्रा’ के बीच हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस अपने जनादेश और अपने विधायकों को बचाने में लगातार नाकाम रही है। विएगास ने दावा किया कि बीजेपी के तमाम प्रलोभनों के बावजूद वे और उनके साथी विधायक क्रूज सिल्वा पार्टी के साथ मजबूती से डटे रहे, जबकि कांग्रेस के विधायक लगातार पाला बदलते रहे हैं।

वोट ट्रांसफर और जमीनी तालमेल की कमी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AAP और GFP के बीच जमीनी स्तर पर वोटों के हस्तांतरण (Vote Transfer) का कोई मजबूत आधार नहीं बन पा रहा था। फतोर्दा में AAP का कैडर कमजोर है, जबकि जिन इलाकों में AAP के विधायक हैं, वहां GFP का कोई खास प्रभाव नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के नेताओं को लगने लगा था कि यह गठबंधन अकेले दम पर कोई बड़ा चुनावी फायदा नहीं दिला सकता।

कांग्रेस को राहत, नए समीकरणों की तलाश

‘गोवा फर्स्ट’ में पैदा हुई इस तल्खी ने कांग्रेस को बड़ी राहत दी है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील दक्षिण गोवा के सालसेते तालुका (जिसमें 8 विधानसभा सीटें आती हैं और जहां लगभग 36% कैथोलिक व 10% मुस्लिम आबादी है) में यह तीसरा मोर्चा सीधे तौर पर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता था।

2022 में कांग्रेस के 11 में से 8 विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी अब नए सिरे से जमीन तलाश रही है। सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस को दक्षिण गोवा की 20 सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

पार्टी को उम्मीद है कि ‘माटी के बेटों’ की राजनीति करने वाली रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) के साथ उसका प्रस्तावित तालमेल युवाओं और हिंदू बहुजन समाज के वोटों को एकजुट करेगा। इसके अलावा, हाल ही में अमित पालेकर और प्रतिमा कूटिन्हो जैसे चेहरों के कांग्रेस में आने से भी पार्टी का मनोबल बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का दंगल अंततः बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चों के बीच ही सिमटने के आसार हैं, जिसमें किसी तीसरे विकल्प के लिए जगह बेहद सीमित दिख रही है।