थलाइवा का जलवा कैमियो का मेला Jailer 2 में एक्शन दमदार, कहानी कमजोर

मूवी रिव्यू: जेलर 2 (Jailer 2) कास्ट: रजनीकांत, राम्या कृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती, विद्या बालन, एसजे सूर्या, योगी बाबू, मोहनलाल, सूरज वेंजारामूडु, नमो नारायण, शिवा राजकुमार, ऋतिक रोशन, विजय सेतुपति डायरेक्टर: नेल्सन दिलीपकुमार श्रेणी: एक्शन, ड्रामा, क्राइम, कॉमेडी (तमिल, हिंदी) अवधि: 2 घंटे 45 मिनट क्रिटिक रेटिंग: 3/5
सिनेमा जगत के ‘थलाइवा’ रजनीकांत (Rajinikanth) की फिल्मों का अपना एक अलग ही यूनिवर्स होता है। उनके चलने-बोलने से लेकर चश्मे को घुमाने और सिगार सुलगाने जैसी हर अदा के फैंस कायल हैं। साल 2023 में उनके इसी स्वैग ने ‘जेलर’ (Jailer) को ब्लॉकबस्टर बनाया था। अब लेखक-निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार उसी कामयाबी को दोहराने के लिए इसके बहुप्रतीक्षित सीक्वल ‘जेलर 2’ (Jailer 2) के साथ लौटे हैं। सेकंड हाफ में कहानी के थोड़ा ढीला पड़ने के बावजूद फिल्म पर रजनीकांत का करिश्माई अंदाज पूरी तरह हावी रहता है। उस पर मोहनलाल, विजय सेतुपति, ऋतिक रोशन, शिवा राजकुमार और जैकी श्रॉफ के कैमियो सिनेमाघरों में फैंस के जश्न में सोने पर सुहागा साबित होते हैं।
‘जेलर 2’ की कहानी
कहानी ठीक वहीं से शुरू होती है, जहां पिछली फिल्म खत्म हुई थी। रिटायर्ड जेलर ‘टाइगर’ मुथुवेल पांडियन (रजनीकांत) अपनी खून-खराबे भरी पिछली जिंदगी से दूर, पत्नी विजया (राम्या कृष्णन), बहू श्वेता (मिर्ना) और पोते रित्विक के साथ एक गुमनाम और शांत जीवन जी रहा है। लेकिन अतीत के हिसाब-किताब और बदले की आग उसे दोबारा उसी मार-धाड़ और अपराध की दुनिया में खींच लाती है।
प्राचीन मूर्तियों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का गुर्गा दिलीप (सूरज वेंजारामूडु) अपने दोस्त वर्मन की मौत का बदला लेने मुथु को चुनौती देने आ धमकता है। बात यहीं खत्म नहीं होती। मूर्ति तस्करी नेटवर्क का सरगना बोधि कल्पक (एसजे सूर्या) और उसका परिवार—बहन कांता (विद्या बालन), पिता चक्री (मिथुन चक्रवर्ती) और उसके भाई—मुथु के अपनों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। मुथु इन नए दुश्मनों से किस तरह निपटता है, यह देखना रजनीकांत के फैंस के लिए किसी विजुअल ट्रीट से कम नहीं है।
कैसा है डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले?
लेखक-निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार ने पिछली ‘जेलर’ के टेम्पलेट पर ही इस सीक्वल को भी एक फुल कमर्शियल मास एंटरटेनर बनाया है। उन्होंने धांसू एक्शन सीक्वेंस के साथ-साथ कॉमेडी, डांस और इमोशन के सारे एलिमेंट पिरोए हैं। फिल्म के पहले हिस्से में कॉमेडी एक बड़ा प्लस पॉइंट है, जो दर्शकों को खूब एंटरटेन करती है। अनिरुद्ध रविचंदर का धमाकेदार बैकग्राउंड स्कोर और विजय कार्तिक कनन की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी फिल्म की बड़ी ताकत हैं। फिल्म में ‘रजनी मोमेंट्स’ भी भरपूर हैं; खासकर इंटरवल से ठीक पहले वाला बर्थडे सीन बेहद जानदार है।
हालांकि, सेकंड हाफ में कहानी अपनी पकड़ थोड़ी खो देती है। इसकी सबसे बड़ी वजह विलेन के रूप में कल्पक परिवार का कमजोर होना है। एसजे सूर्या, विद्या बालन और मिथुन चक्रवर्ती का ट्रैक उतना प्रभावी नहीं बन पाया है, जितनी उम्मीद थी। इसके अलावा, इस बार इमोशनल एंगल भी पहली फिल्म जितना मजबूत नहीं लगता। वहीं, नोरा फतेही के आइटम नंबर में भी तमन्ना भाटिया वाले ‘कवाला’ का वह जादू नदारद है।
एक्टिंग और कैमियो का कमाल
रजनीकांत फिल्म का मुख्य आधार स्तंभ हैं। 75 साल की उम्र में भी अपने मजबूत कंधों पर इस तरह की बिग स्केल फिल्म का भार उठाना वे बखूबी जानते हैं। जेलर मुथुवेल पांडियन के रूप में स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी और संवाद अदायगी देखने लायक है। हालांकि, कई जगह डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा रजनीकांत के स्टारडम पर भरोसा दिखाया है, जिससे कुछ ‘नया’ देखने की उम्मीद करने वाले दर्शक थोड़े निराश हो सकते हैं।
रजनीकांत के अलावा, टैक्सी ड्राइवर बने योगी बाबू और मूर्ति के रोल में नमो नारायण की कॉमिक टाइमिंग मजेदार है। फिल्म में सितारों की भारी-भरकम फौज है। राम्या कृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती, विद्या बालन और एसजे सूर्या जैसे दिग्गज कलाकार फिल्म को बल तो देते हैं, लेकिन उनके किरदार उम्मीद के मुताबिक गहरा असर नहीं छोड़ते।
फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसके कैमियो हैं। मोहनलाल, शिवा राजकुमार और जैकी श्रॉफ की तिकड़ी के साथ-साथ ऋतिक रोशन और विजय सेतुपति के कैमियो दर्शकों को रोमांचित कर देते हैं। और हां, क्लाइमेक्स में यह फिल्म अपने अगले पार्ट की झलक भी दिखा जाती है, जो रजनी फैंस के लिए किसी रिटर्न गिफ्ट की तरह है।
क्यों देखें:
अगर आप रजनीकांत के डाई-हार्ड फैन हैं, उनके स्वैग, स्टाइल और मास एंटरटेनर फिल्मों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो ‘जेलर 2’ आपके लिए एक पैसा-वसूल एंटरटेनर है।

