‘राजनीति नहीं, जननीति’, दिव्या मित्तल ने लॉन्च की पार्टी, जनता से किया ये वादा

पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) ने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखते हुए अपनी नई पार्टी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ (Janneeti Bharat) रखा है। गंगा किनारे अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि जिस तरह गंगा की हर बूंद का महत्व है, उसी तरह उनकी पार्टी में हर व्यक्ति अहम होगा।
पार्टी लॉन्चिंग के दौरान जनता के मिले अपार समर्थन और संदेशों के लिए उन्होंने आभार जताया और अपनी कार्यशैली व विजन को स्पष्ट करते हुए तीन प्रमुख वचन (3 Promises) दिए, जो उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा होंगे।
वचन 1: देश की नीतियों के केंद्र में होंगे लोग (जनभागीदारी)
दिव्या मित्तल ने पहला वचन देते हुए कहा कि ‘जननीति भारत’ पार्टी में नीतियां जनता की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। उन्होंने मिर्जापुर के एक गांव की रहने वाली देवकली का उदाहरण देते हुए बताया कि पानी की समस्या होने के बावजूद वह महिला गांव के लिए स्कूल की मांग कर रही थी, लेकिन उसकी मांग पूरी नहीं हुई। दिव्या ने जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी की नीतियों का आधार जनहित होगा, जिसका मूल मंत्र ‘जन से नीति और नीति से भारत’ है।
वचन 2: हर फैसला जरूरत और जनहित देखकर होगा
अपने दूसरे वचन में दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि पार्टी हर फैसला यह देखकर लेगी कि उसकी जरूरत कितनी है और उससे कितने लोगों को लाभ होगा। उन्होंने एक सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक सड़क को उस तरफ मोड़ दिया गया जहां आबादी कम थी, केवल कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए। उन्होंने वादा किया कि उनकी पार्टी किसी व्यक्ति विशेष के बजाय व्यापक जनहित, बेटियों और छात्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देगी।
वचन 3: हर काम का हिसाब जनता को देना होगा (पारदर्शिता)
तीसरे वचन के तहत दिव्या मित्तल ने पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) पर जोर दिया। उन्होंने एक बुजुर्ग महिला का जिक्र करते हुए कहा कि आवास योजना के तहत घर पाने के लिए उस महिला को बिचौलिए को 5,000 रुपये देने पड़े थे। सरकारी योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पर प्रहार करते हुए दिव्या ने कहा कि ‘जननीति भारत’ पार्टी में हर छोटे-बड़े काम का हिसाब जनता को दिया जाएगा, ताकि लोगों को उनके अधिकारों के लिए परेशान न होना पड़े।
इन 3 वचनों के साथ दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में खुद को पेश किया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह इन वादों को जमीन पर उतारने के लिए पार्टी का संगठनात्मक ढांचा किस तरह तैयार करती हैं।

