Gen Z को समझने में जुटी BJP, नेताओं का पैनल तय करेगा संवाद का तरीका

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

देश भर में छात्र आंदोलनों और सड़कों पर बढ़ते असंतोष के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी राजनीतिक रणनीति और संवाद शैली में बुनियादी बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने युवा पीढ़ी (Gen-Z) की नब्ज टटोलने और उनके बीच अपनी पैठ फिर से मजबूत करने के लिए 80 सदस्यों का एक विशेष आंतरिक पैनल गठित किया है।

इस पैनल का मुख्य कार्य यह समझना है कि आज की युवा पीढ़ी हिंदुत्व को किस नजरिए से देखती है और उससे किस टोन व शब्दावली में संवाद किया जाना चाहिए।

मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन में 6 उप-समूह सक्रिय

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने इस पूरी कवायद को ‘युवा संवाद’ नाम दिया है। केंद्रीय युवा मामले मंत्री मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन में कुल छह उप-समूह काम कर रहे हैं, जिनकी अब तक कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।

इस पैनल की पहली बैठक की अध्यक्षता भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने की थी। पैनल में गोरखपुर सांसद रवि किशन, नई दिल्ली सांसद बांसुरी स्वराज, बेंगलुरु दक्षिण सांसद तेजस्वी सूर्या, वडोदरा सांसद हेमांग जोशी और पार्टी महासचिव स्मृति ईरानी जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं।

पैनल बनाने की नौबत क्यों आई?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद की सबसे बड़ी वजह जुलाई में हुए पेपर लीक विरोधी विशाल छात्र प्रदर्शन रहे। उस समय पार्टी और सरकार युवाओं के गुस्से व आंदोलन की व्यापकता का समय रहते सही आकलन नहीं कर पाई थी।

आंदोलन के बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। इस घटनाक्रम के बाद शीर्ष नेतृत्व को यह स्पष्ट संदेश गया कि युवाओं के असंतोष को पारंपरिक राजनीतिक चश्मे से देखना नुकसानदेह साबित हो सकता है और इसके लिए पूरी तरह नए नैरेटिव की जरूरत है।

‘सीधे हिंदुत्व थोपने के बजाय संस्कारों पर बात हो’

पैनल की रिपोर्ट में इस बात पर गंभीरता से विमर्श किया जा रहा है कि युवा वर्ग हिंदुत्व के विचार को किस रूप में ग्रहण करता है। गोरखपुर सांसद रवि किशन ने सुझाव दिया कि युवाओं पर सीधे तौर पर हिंदुत्व थोपने के बजाय सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होनी चाहिए।

रिपोर्ट में रवि किशन के हवाले से कहा गया है, “वे हिंदू पैदा हुए हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस पर बहुत ज्यादा जोर देने की जरूरत है। बेहतर होगा कि आध्यात्मिक शक्ति और संस्कारों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।” पैनल का यह भी मानना है कि संवाद में पश्चिमी शब्द ‘Gen Z’ के बजाय ‘युवा’ या ‘यूथ’ जैसे भारतीय और सहज शब्दों का इस्तेमाल अधिक कनेक्ट करेगा। इसके साथ ही, अगर प्रशासनिक या नीतिगत स्तर पर गलतियां होती हैं, तो उन्हें स्वीकार कर आगे न दोहराने की कार्यशैली अपनाने पर बल दिया गया है।

विपक्ष को घेरने के लिए रील्स और जवाबी शक्ति प्रदर्शन

पैनल के इन सुझावों का असर भाजपा के कार्यक्रमों और सार्वजनिक रैलियों में दिखने लगा है। 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वडोदरा रैली में इसका सीधा प्रयोग देखने को मिला, जहां पीएम के वॉकवे पर मशहूर अंतरराष्ट्रीय रॉक बैंड ‘क्वीन’ के ‘वी विल रॉक यू’ और फिल्म ‘धुरंधर’ के गानों का फ्यूजन बजाया गया, जिससे सोशल मीडिया पर रील्स बनाई जा सकें।

विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को बेअसर करने के लिए भी एक नई रणनीति तय की गई है। इसके तहत यदि विपक्ष किसी प्रदर्शन में 10,000 लोग जुटाता है, तो भाजपा उसके जवाब में कम से कम 50,000 समर्थकों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन करेगी। उदाहरण के तौर पर, जब राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट मार्च निकाल रहे थे, तब भाजपा ने उसी दौरान असम और गुजरात में उनके खिलाफ जवाबी प्रदर्शन खड़े किए।

पार्टी की अगली कार्ययोजना ऐसे युवाओं तक पहुंचने की है जो किसी भी राजनीतिक दल से वैचारिक रूप से नहीं जुड़े हैं, और इसमें विशेष रूप से युवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।