अंकिता केस में फिर तेज हुई सियासत, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर विरोध

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित तौर पर संलिप्त दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में हुई एक प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और ज्योति रौतेला ने सरकार पर तीखे हमले किए।
‘उत्तराखंड की जनता के मुंह पर तमाचा’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे उत्तराखंड की जनता के मुंह पर तमाचा करार दिया। उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति से आह्वान किया कि अंकिता के हत्यारों के विरोध में महिलाएं घरों से बाहर निकलें और इस सरकार को गिराने की मुहिम का हिस्सा बनें।
साक्ष्य मिटाने और ‘वीआईपी’ को बचाने का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में महिला अपराधों में बढ़ोतरी हुई है और अंकिता हत्याकांड में सरकार के संरक्षण में अधिकारियों ने साक्ष्य मिटाए हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता की चैट में सामने आए ‘वीआईपी’ (VIP) के पहलू को दबा दिया गया और सरकार उसे बचाने में जुटी है।
हरक सिंह रावत ने सरकार को ‘तानाशाह और बेशर्म’ करार दिया। वनंत्रा रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने यमकेश्वर की विधायक के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना रिसॉर्ट के साक्ष्य मिटाया जाना असंभव था। उन्होंने भाजपा महिला मोर्चा की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
सीबीआई जांच की दिशा और कार्रवाई पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अंकिता ने अपने स्वाभिमान को जीवन से ऊपर रखा और उसका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने अंकिता के माता-पिता को दिल्ली में धरने के दौरान रात के अंधेरे में हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की। रावत ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि एजेंसी आखिर किस पहलू की जांच कर रही है।
ज्योति रौतेला ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सीबीआई जांच की मांग हो रही थी, लेकिन सरकार ने सुध नहीं ली। जब भाजपा नेता सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर का ऑडियो वायरल हुआ, तब जाकर जांच की संस्तुति की गई, लेकिन उस पर भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक दुष्यंत गौतम को उनके पद से नहीं हटाया जाता, पार्टी का यह विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा।

