पुलिस का बाइक भत्ता ₹700 से ₹1000 हुआ, लेकिन ड्यूटी का खर्च कितना?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर पुलिसकर्मियों को एक बड़ी राहत देते हुए उनके कई भत्तों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। फील्ड ड्यूटी पर तैनात निरीक्षकों (Inspectors) और उपनिरीक्षकों (Sub-Inspectors) का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। करीब 43 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी आर्थिक सहायता के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों और थानों की वास्तविक कार्यप्रणाली को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक हजार रुपये में महीने भर सरकारी काम के लिए मोटरसाइकिल चलाना संभव है?
₹1000 का भत्ता: महीने में कितने किलोमीटर का सफर?
लखनऊ में वर्तमान में पेट्रोल की कीमत लगभग 102 रुपये प्रति लीटर है। इस दर से एक हजार रुपये में करीब 9.8 लीटर पेट्रोल खरीदा जा सकता है। अगर किसी पुलिसकर्मी की मोटरसाइकिल औसतन 35 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो 9.8 लीटर पेट्रोल से वह पूरे महीने में लगभग 343 किलोमीटर का सफर ही तय कर पाएगा। इसे 30 दिनों में बांटें, तो प्रतिदिन के लिए महज 11.4 किलोमीटर की यात्रा संभव होगी।
थाने की वास्तविक दौड़भाग और पेट्रोल का खर्च
दैनिक ड्यूटी के दौरान एक पुलिस निरीक्षक या उपनिरीक्षक का काम केवल थाने तक सीमित नहीं होता। विवेचना, गवाहों से पूछताछ, घटनास्थल का निरीक्षण, कोर्ट में पेशी, वीआईपी ड्यूटी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें दिनभर शहर में कई स्थानों पर जाना पड़ता है।
लखनऊ के एक वीआईपी थाने में तैनात एक पुलिस निरीक्षक के मुताबिक, वीआईपी ड्यूटी, गश्त और अन्य कार्यों के चलते उनकी मोटरसाइकिल रोजाना औसतन 30 से 35 किलोमीटर चलती है। महीने भर में यह दूरी 900 से 1,000 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। 30 से 35 किलोमीटर प्रति लीटर के माइलेज पर उन्हें हर महीने करीब 26 से 30 लीटर पेट्रोल की जरूरत पड़ती है, जिसका खर्च मौजूदा कीमतों पर 2,600 से 3,000 रुपये के बीच आता है। ऐसे में 1,000 रुपये का भत्ता उनके वास्तविक खर्च का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही पूरा कर पाता है।
सरकारी वाहन और भत्ते की सीमाएं
थानों में गश्त और आपात स्थिति के लिए सरकारी चारपहिया और दोपहिया वाहन मौजूद होते हैं, लेकिन कई बार ये वाहन अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में व्यस्त होते हैं। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले और संकरे रास्तों में त्वरित कार्रवाई के लिए निजी दोपहिया वाहन अधिक सुविधाजनक होते हैं, जिसके कारण पुलिसकर्मी अपनी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि सभी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी समान नहीं होती। कुछ को थाने के आसपास ही काम करना होता है, जबकि कुछ को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में एक तय मासिक भत्ता सभी की जरूरतों को समान रूप से पूरा नहीं कर सकता।
राहत जरूर, लेकिन वास्तविक खर्च से दूर
सरकार द्वारा भत्ते में 300 रुपये की बढ़ोतरी निश्चित रूप से लंबे समय से स्थिर भत्ते के बाद एक स्वागत योग्य कदम है, जिससे पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। लेकिन पेट्रोल की कीमतों, सर्विसिंग, इंजन ऑयल और रखरखाव के खर्च को देखते हुए, यह राशि पुलिसकर्मियों द्वारा किए जा रहे वास्तविक खर्च के मुकाबले काफी कम नजर आती है।

