ईरान-अमेरिका तनाव में नया मोड़? वेंस की चिट्ठी पर तेहरान ने दिया बड़ा बयान

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेजई ने पुष्टि की है कि अगर फिर से युद्ध भड़कता है, तो देश की मौजूदा परमाणु नीति (Nuclear Doctrine) को बनाए रखने या बदलने पर आंतरिक बहस चल रही है। शनिवार रात नेशनल टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में रेजई ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) का एक पत्र मिला है। उनके मुताबिक, अमेरिका की भाषा और सुर में पूरी तरह से बदलाव आया है, जिसे उन्होंने एक ‘बहुत अच्छा संकेत’ बताया है।

परमाणु नीति में बदलाव की उठ रही मांग

रेजई ने स्पष्ट किया कि ईरान की परमाणु नीति को लेकर अभी तक कोई नया आधिकारिक या सरकारी फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि, IAEA के निरीक्षणों में पूरा सहयोग देने के बावजूद दुश्मन द्वारा ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों को निशाना बनाए जाने के बाद जनता के बीच इस नीति को बदलने की मांग उठ रही है।

उन्होंने कहा, “जब लोग इन वास्तविकताओं को देखते हैं, तो वे पूछते हैं कि हमें उन्हीं शर्तों के तहत क्यों आगे बढ़ना चाहिए। ईरान के लोगों को अपनी मांगें व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन सरकार ने अभी नया फैसला नहीं लिया है।” रेजई ने यह भी साफ किया कि ईरान अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य बना रहेगा और किसी भी परमाणु चर्चा में अपने 22 अधिकारों की मजबूती से मांग करेगा।

जेडी वेंस का पत्र और अमेरिका के बदले सुर

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पत्र का जिक्र करते हुए सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि उन्होंने पत्र का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया है, लेकिन अभी तक इसका कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है। रेजई के अनुसार, इस पत्र का सुर डोनाल्ड ट्रंप के पिछले पत्रों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने इसे ईरानी राष्ट्र की शक्ति और जीत का संकेत बताया। हालांकि, अमेरिकी पक्ष द्वारा इसे सार्वजनिक न किए जाने का हवाला देते हुए उन्होंने पत्र की विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।

सात शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं

कूटनीति और बातचीत की संभावनाओं पर रेजई ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका लगातार बातचीत पर जोर दे रहा है, लेकिन ईरान अपनी सात मांगों को पूरी तरह लागू करने पर अड़ा है।

इन मांगों में सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, फ्रीज किए गए फंड्स की बहाली और समुद्री नाकाबंदी हटाना शामिल है। रेजई ने साफ किया कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी सूरत में एक ग्राम भी संवर्धित (enriched) परमाणु सामग्री देश से बाहर नहीं जाएगी।

क्षेत्रीय सुरक्षा की कमान खुद संभालेंगे देश

हाल ही में तेहरान में हुई चार-पक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए रेजई ने कहा कि विदेशी ताकतें क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था खुद इस क्षेत्र के देशों को ही तय करनी होगी। यूरोप और अमेरिका पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि पश्चिम और दुनिया में जो भी मौजूदा आर्थिक संकट है, वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध का ही नतीजा है। रेजई ने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन कोई गलती करता है, तो उसे एक भयानक हमले और ईरान के कड़े बचाव का सामना करना पड़ेगा।