मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के चित्रकार पहुंचे काशी, धरोहरों को देंगे नई कलात्मक पहचान

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी (वाराणसी) में श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर स्थित ललिता घाट पर शनिवार को एक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र कार्यशाला का शानदार आगाज हुआ। गंगा महासभा और ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश से आए करीब 50 चित्रकार हिस्सा ले रहे हैं।
पद्मश्री कलाकारों की गरिमामयी उपस्थिति में उद्घाटन
इस प्रतिष्ठित कार्यशाला का उद्घाटन अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कलाकार श्रीमती दुलारी देवी, श्री श्याम शर्मा और श्री अद्वैत गणनायक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कॉरिडोर बनने के बाद पहली बार इतना बड़ा कलात्मक आयोजन
श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के भव्य निर्माण के बाद यह पहली बार है जब इस परिसर में इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकारों की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य काशी की आध्यात्मिक चेतना को रंगों के जरिए व्यक्त करना और विदेशी कलाकारों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराना है।
‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि’ है कार्यशाला की थीम
इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की थीम “राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश: धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन” रखी गई है। इसमें शामिल चित्रकार यूपी के तीर्थों, मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों, अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप को अपनी कल्पना और कला के जरिए कैनवास पर उकेरेंगे।
आयोजकों का मानना है कि तीर्थों का विकास केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनसे जुड़ी आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों का संरक्षण भी जरूरी है।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में लगेगी कलाकृतियों की प्रदर्शनी
इस तीन दिवसीय कार्यशाला में तैयार की गई सभी पेंटिंग्स और कलाकृतियों की भव्य प्रदर्शनी 3 से 5 नवंबर, 2026 तक ‘रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र’ की सिंजो आबे कला दीर्घा में लगाई जाएगी।
बता दें कि यह कार्यशाला 3 से 5 नवंबर तक होने वाली ‘संस्कृति संसद 2026’ के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला का ही एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए काशी को वैश्विक कला और सांस्कृतिक संवाद के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

