यूपी में NCP का नया चुनावी दांव: ‘जाति नहीं जरूरत देखो’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की सियासी बिसात बिछने लगी है। इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उत्तर प्रदेश इकाई ने राज्य में अपने संगठन विस्तार और सामाजिक मुद्दों को लेकर एक आक्रामक अभियान की शुरुआत की है। पार्टी ने नए पोस्टरों के जरिए जहां संगठन विस्तार के लिए ‘हर बूथ, हर परिवार, NCP के साथ’ का नारा दिया है, वहीं आरक्षण व्यवस्था को लेकर ‘जाति नहीं, जरूरत देखो’ और ‘वोट नहीं, व्यवस्था देखो’ जैसे संदेशों के साथ ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म मूवमेंट’ (Reservation Reform Movement) का ऐलान किया है।

आरक्षण पर ‘जरूरत’ को आधार बनाने की मांग
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह के नाम से जारी पोस्टर में आरक्षण व्यवस्था में सुधार की वकालत की गई है। पार्टी की इस राजनीतिक पहल के तहत समान अवसर, पारदर्शी व्यवस्था और वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
इस अभियान के जरिए एनसीपी ने सरकारी व्यवस्था की समीक्षा करने, वास्तविक वंचितों तक लाभ की पहुंच सुनिश्चित करने और शिक्षा व रोजगार के समान अवसर बढ़ाने की मांग उठाई है। इसे यूपी में जातिगत राजनीति के समानांतर एक नए विमर्श को खड़ा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
‘हर बूथ, हर परिवार’ से संगठन विस्तार की कवायद
पार्टी ने अपने दूसरे पोस्टर में युवाओं और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर पूरा फोकस रखा है। पोस्टर में ‘जुड़ेंगे हम, जीतेंगे हम, NCP के संग, बदलेंगे हम’ का नारा देते हुए सामाजिक न्याय, पारदर्शी राजनीति, सर्वांगीण विकास और युवा सशक्तिकरण को प्रमुख चुनावी एजेंडा बताया गया है।
डिजिटल सदस्यता को बढ़ावा देने के लिए पार्टी ने पोस्टर पर मिस्ड कॉल नंबर और QR कोड भी जारी किया है, ताकि बूथ स्तर पर नए सदस्यों को सीधे संगठन से जोड़ा जा सके।

उत्तर प्रदेश में पहले से गरमाया है आरक्षण का मुद्दा
एनसीपी का यह कदम ऐसे समय आया है जब राज्य में आरक्षण सुधार को लेकर पहले से ही सियासी घमासान मचा हुआ है।
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छात्रों की मांगें: अगस्त 2026 में आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं, जिस पर सरकार ने उनकी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था।
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सपा का रुख: वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार इन मांगों के विरोध में मुखर रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा।”
2027 में जमीन तलाशने की चुनौती
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एनसीपी का संगठनात्मक दायरा फिलहाल बेहद सीमित है। ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस अभियान को केवल पोस्टरों और डिजिटल सदस्यता तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर उतारने की होगी। यदि पार्टी युवाओं और गैर-परंपरागत मतदाताओं के बीच पैठ बनाने में सफल रहती है, तो 2027 के चुनाव में वह कुछ खास पॉकेट्स में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा सकती है।
