चुनार में अनुराग सिंह की हैट्रिक होगी? समझें मिर्जापुर का चुनावी गणित

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित मिर्जापुर जिले की चुनार विधानसभा सीट राजनीतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। ऐतिहासिक चुनार का किला, गंगा किनारे का इलाका और ग्रामीण-शहरी मिली-जुली आबादी इस सीट को खास बनाती है। मिर्जापुर जिले की पांच विधानसभा सीटों—मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे (सुरक्षित)—में से चुनार एक सामान्य सीट है। पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) में यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार जीत दर्ज कर अपना दबदबा बनाया है, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) अपनी खोई सियासी जमीन हासिल करने में जुटी है।
2022 चुनाव: अनुराग सिंह ने दर्ज की थी एकतरफा जीत
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग सिंह ने इस सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने विपक्षी गठबंधन की ओर से मैदान में उतरे अपना दल (कमेरावादी) के प्रत्याशी रामाशंकर प्रसाद सिंह को 47,614 वोटों के बड़े अंतर से मात दी।
इस चुनाव में अनुराग सिंह को 1,10,980 वोट मिले, जबकि अपना दल (कमेरावादी) के रामाशंकर प्रसाद सिंह 63,366 वोटों पर सिमट गए थे।
2017 में 62 हजार से ज्यादा की लीड, 2012 में सपा का था कब्जा
2017 के विधानसभा चुनाव में भी अनुराग सिंह ने यहां बड़ी जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के जगतांबा सिंह पटेल को 62,228 वोटों के भारी अंतर से हराया था। अनुराग सिंह के खाते में 1,05,608 वोट आए थे, जबकि सपा के जगतांबा सिंह पटेल को 43,380 वोट मिले थे।
इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। तब सपा प्रत्याशी जगतांबा सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के घनश्याम को 20,708 वोटों से हराया था। उस चुनाव में जगतांबा सिंह को 67,265 और बसपा के घनश्याम को 46,557 वोट मिले थे।
जातीय ताना-बाना और सामाजिक संतुलन
चुनार विधानसभा क्षेत्र में चुनावी नतीजे काफी हद तक सामाजिक समीकरणों से तय होते हैं। इस क्षेत्र में राजपूत, पटेल (कुर्मी), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है। स्थानीय सामाजिक संतुलन और जातीय प्रभाव को देखते हुए ही राजनीतिक दल यहां अपने प्रत्याशियों का चयन करते हैं।
स्थानीय मुद्दे: सड़क, पानी के साथ चुनार किले का विकास
इस विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी समस्याएं हमेशा चुनावी विमर्श के केंद्र में रहती हैं। सड़क, सिंचाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कृषि, रोजगार और ग्रामीण आधारभूत ढांचा प्रमुख मुद्दे हैं। इसके साथ ही चुनार किला, पर्यटन विकास, गंगा घाटों का सुधार और स्थानीय कुटीर व पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर भाजपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाने और विपक्ष के सामने इसे भेदने की चुनौती होगी।
