जेवर में BJP की हैट्रिक की तैयारी, एयरपोर्ट कितना बदलेगा चुनावी गणित?

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

गौतमबुद्ध नगर जिले की जेवर विधानसभा सीट अब अपने इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चलते एक नई पहचान बना चुकी है। क्षेत्र में विकास की उम्मीदों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी इस मेगा प्रोजेक्ट से सियासी मोर्चे पर बड़ी उम्मीदें हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) में जेवर से लगातार जीत दर्ज करने वाली भाजपा इस बार जेवर एयरपोर्ट के मुद्दे को आगे रखकर जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है। साल 1990 के बाद से भाजपा यहां पांच बार और बहुजन समाज पार्टी (BSP) दो बार जीत दर्ज कर चुकी है।

2022 का चुनाव: सपा-रालोद गठबंधन को मिली करारी शिकस्त

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक धीरेन्द्र सिंह पर फिर से भरोसा जताया था। इस चुनाव में धीरेन्द्र सिंह ने 1,17,205 वोट हासिल कर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़े राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना को 56,315 वोटों के भारी अंतर से हराया।

इस चुनाव में अवतार सिंह भड़ाना को 60,890 वोट मिले, जबकि बसपा के नरेंद्र कुमार 45,256 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017 और 2012: बसपा से सत्ता छीनकर भाजपा ने की वापसी

इससे पहले 2017 के चुनाव में धीरेन्द्र सिंह ने जेवर में भाजपा का झंडा फहराया था। उन्होंने 1,02,979 वोट (करीब 49 प्रतिशत) हासिल कर तत्कालीन विधायक और बसपा प्रत्याशी वेदराम भाटी (80,806 वोट) को 22,173 वोटों से मात दी थी। सपा के नरेंद्र नागर महज 13,239 वोट पाकर तीसरे नंबर पर सिमट गए थे।

2012 में यह सीट बसपा के खाते में गई थी। वेदराम भाटी ने 67,524 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। वर्तमान भाजपा विधायक धीरेन्द्र सिंह उस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। तब वे 58,024 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। 2012 में सपा के बिजेन्द्र सिंह भाटी 35,166 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे।

जेवर का जातीय समीकरण: दलित, ठाकुर और गुर्जर वोटरों का दबदबा

जेवर विधानसभा सीट के जातीय समीकरणों पर नजर डालें तो स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां सबसे ज्यादा दलित मतदाता हैं, जिनकी आबादी करीब 80 हजार है। इसके बाद ठाकुर और गुर्जर बिरादरी का नंबर आता है। इन दोनों जातियों की आबादी लगभग 70-70 हजार आंकी गई है। इन तीन प्रमुख वर्गों के ही कुल वोट दो लाख से ज्यादा हैं।

इसके अलावा क्षेत्र में जाट और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी 25-25 हजार के करीब बताई जाती है। मुस्लिम मतदाता और गुर्जरों के इतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भी लगभग 30-30 हजार वोटर इस सीट पर राजनीतिक दलों का चुनावी गणित प्रभावित करने की स्थिति में हैं।