8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर से बड़ा खेल करेगा सालाना इंक्रीमेंट

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नई दिल्ली : आठवें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं में फिटमेंट फैक्टर के साथ-साथ सालाना इंक्रीमेंट सबसे अहम मुद्दा बन गया है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि केवल एकमुश्त बढ़ोतरी से ज्यादा आर्थिक फायदा उस फैसले से होगा जो हर साल बेसिक सैलरी में कंपाउंडिंग के जरिए इजाफा करेगा।

फिटमेंट फैक्टर का शुरुआती गणित

वर्तमान बेसिक पे को फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नई संशोधित बेसिक पे तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। हालांकि, 8वें आयोग के लिए 3.61, 3.83 या 4 जैसे आंकड़े अभी केवल अनुमान हैं। उदाहरण के लिए, 56,100 रुपये की मौजूदा बेसिक पे पर अगर 2.57 का ही फैक्टर लगाया जाए, तो नई बेसिक करीब 1.44 लाख रुपये हो जाएगी। यह फायदा एक झटके में तुरंत दिखता है, लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है।

सालाना इंक्रीमेंट: लंबे समय का असली गेमचेंजर

वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों को 3% सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। NC-JCM और अन्य कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 5%, 6% या 7% तक करने की मांग कर रहे हैं। अगली बढ़ोतरी हमेशा पिछली बढ़ी हुई बेसिक पे पर होती है, जिससे लंबे समय में कंपाउंडिंग का असर साफ नजर आता है।

इंक्रीमेंट बढ़ने पर कैसे पलटेगा खेल (उदाहरण)

अगर किसी कर्मचारी की शुरुआती बेसिक पे 56,100 रुपये है, तो सिर्फ इंक्रीमेंट दर बदलने पर लंबी नौकरी में बेसिक पे का अंतर कुछ इस तरह होगा:

सालाना इंक्रीमेंट दर 15वें साल की बेसिक पे (अनुमानित) 30वें साल की बेसिक पे (अनुमानित)
5% इंक्रीमेंट मिलने पर करीब ₹1.17 लाख करीब ₹2.42 लाख
7% इंक्रीमेंट मिलने पर करीब ₹1.55 लाख करीब ₹4.27 लाख

(नोट: ये आंकड़े केवल गणितीय उदाहरण हैं, वेतन आयोग लागू होने पर अंतिम वेतन अलग हो सकता है।)

अंतिम फैसले का इंतजार

फिलहाल 8वें वेतन आयोग की तरफ से न तो फिटमेंट फैक्टर का कोई अंतिम आंकड़ा तय किया गया है और न ही 5 से 7 फीसदी इंक्रीमेंट की मांग को आधिकारिक मंजूरी मिली है। कर्मचारियों और उनके संगठनों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार सालाना इंक्रीमेंट के नियमों में क्या बदलाव करती है। फैसला अगर कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो इसका फायदा पूरी नौकरी के दौरान देखने को मिलेगा।