UP Assembly Election: BJP की कमजोर सीटों पर NDA सहयोगियों की नजर

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों ने भी अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सीटों के बंटवारे से पहले ही बीजेपी के सहयोगी दलों ने प्रदेश की उन सीटों और जिलों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जहां से बीजेपी या तो लंबे समय से हार रही है, या फिर जहां हार-जीत का अंतर बेहद मामूली रहा है।
इस रणनीति के तहत मुरादाबाद (Moradabad) और उसके आसपास के इलाके सहयोगी दलों के मुख्य राडार पर हैं।
इन 5 सहयोगी दलों ने तेज की सक्रियता
यूपी में एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहे राष्ट्रीय लोक दल (RLD), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP), अपना दल-एस (Apna Dal-S) और निषाद पार्टी के अलावा केंद्र में सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-आठवले) ने 2027 के चुनाव में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। इन सभी दलों ने हाल ही में मुरादाबाद और मंडल स्तर पर अपने-अपने बड़े कार्यक्रम आयोजित कर राजनीतिक जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है:
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13 सितंबर: मुरादाबाद में RPI (आठवले) का सम्मेलन।
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08 सितंबर: मुरादाबाद में निषाद पार्टी का मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन।
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02 अगस्त: मुरादाबाद में अपना दल (S) का क्षेत्रीय सम्मेलन।
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04 जून: ठाकुरद्वारा में RLD की विजय संकल्प महारैली।
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29 अप्रैल: कैलासा बाईपास पर सुभासपा का अति पिछड़ा सम्मेलन।
मुरादाबाद में BJP का हाल और हारी हुई सीटें
मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन पिछले कुछ चुनावों में मिला-जुला या कमजोर रहा है।
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2022 चुनाव: जिले की 6 सीटों में से बीजेपी सिर्फ मुरादाबाद नगर सीट जीत पाई थी।
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2017 चुनाव: पार्टी को मुरादाबाद नगर और कांठ सीट पर जीत मिली थी।
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2012 चुनाव: सिर्फ ठाकुरद्वारा सीट पर जीत मिली (जो 2014 के उपचुनाव में हाथ से निकल गई)।
उपचुनावों को छोड़ दिया जाए, तो मुरादाबाद देहात और बिलारी जैसी सीटों पर पार्टी को लंबे समय से जीत नसीब नहीं हुई है:
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बिलारी: बीजेपी को यहां कभी जीत नहीं मिली।
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मुरादाबाद देहात: आखिरी जीत 1993 में।
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कुंदरकी: आखिरी जीत 1993 में।
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ठाकुरद्वारा: आखिरी जीत 2012 में।
मंडल की अन्य कमजोर सीटों पर भी नजर
मुरादाबाद के अलावा मंडल के दूसरे जिलों में भी कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां बीजेपी लंबे समय से जीत के लिए जूझ रही है। इनमें शामिल हैं:
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अमरोहा: 1996 के बाद से जीत नहीं।
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संभल: 1993 के बाद से जीत नहीं।
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नगीना: 1991 के बाद से जीत नहीं।
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नजीबाबाद: 1991 के बाद से जीत नहीं।
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रामपुर: 2022 के उपचुनाव में पहली बार जीत मिली।
