रिश्तों की गर्माहट और कहानी की जल्दबाजी, कैसी है Netflix की Dilwali Diwali?

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

फिल्म: दिलवाली दिवाली (Dilwaali Diwali) कलाकार: मिहिर आहूजा, मनोज पाहवा, नीलू कोहली, ऑरा भटनागर बडोनी, निमिषा सिरोही निर्देशक: रितेश मेनन श्रेणी: हिंदी, फैमिली, ड्रामा अवधि: 1 घंटा 1 मिनट क्रिटिक रेटिंग: 2.5/5

दिवाली का त्योहार नजदीक है और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर भी इसकी रौनक पूरी तरह से नजर आने लगी है। पिछले हफ्ते रिलीज हुई ‘मीठे में क्या है’ के बाद अब दीपावली के इर्द-गिर्द बुनी गई एक और फैमिली ड्रामा फिल्म ‘दिलवाली दिवाली’ नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हो चुकी है।

निर्देशक रितेश मेनन की यह फिल्म एक बहुत ही खूबसूरत संदेश देती है—कि घर सिर्फ आलीशान दीवारों, साज-सज्जा और सुख-सुविधाओं से नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों और उनके आपसी रिश्तों के अपनेपन से बनता है।

क्या है ‘दिलवाली दिवाली’ की कहानी?

फिल्म की कहानी अंश सिक्का (मिहिर आहूजा) नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नॉर्वे (Norway) में नौकरी करता है। अंश अपने माता-पिता, सुधीर (मनोज पाहवा) और सुखमनी (नीलू कोहली) को एक अच्छी और सुविधाजनक जिंदगी देने के लिए शहर के एक पॉश इलाके में एक आलीशान अपार्टमेंट खरीदता है।

लेकिन, उसके माता-पिता को अपने पुराने घर, मोहल्ले और वहां के लोगों से ज्यादा लगाव है। उन्हें नए घर की चमक-दमक और शहर की सीमित, आधुनिक जीवनशैली बिल्कुल रास नहीं आती। हालांकि, बेटे का दिल न दुखे, इसलिए सुधीर और सुखमनी नए अपार्टमेंट में बहुत खुश होने का दिखावा करते हैं।

कहानी में असल ट्विस्ट और मुश्किलें तब शुरू होती हैं, जब अंश दिवाली की छुट्टियों में घर आता है। माता-पिता के सामने अपने बेटे से यह सच छिपाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। वहीं दूसरी तरफ, अंश की भी अपनी कुछ आर्थिक चुनौतियां हैं, जिन्हें वह परिवार से छिपा रहा है। इन दोनों राज़ों के खुलने पर यह परिवार किस तरह से एकजुट होता है, फिल्म की कहानी इसी ताने-बाने पर बुनी गई है।

कैसा है फिल्म का निर्देशन और कहानी?

रितु मागो द्वारा लिखी गई यह कहानी घर, अपनेपन और पीढ़ियों के बीच बदलती सोच को बखूबी दिखाती है। फिल्म उस आम समस्या पर चोट करती है जहां बच्चे अपने माता-पिता को शहर में लाकर अच्छी जिंदगी देना चाहते हैं, जबकि माता-पिता की असली खुशी किसी बड़े घर में नहीं, बल्कि अपने पुराने यार-दोस्तों और पड़ोसियों के साथ दुख-सुख बांटने में होती है।

डायरेक्टर रितेश मेनन की इस फिल्म का विचार और संदेश तो बहुत प्यारा है, लेकिन फिल्म को काफी जल्दबाजी में समेटने की कोशिश की गई है। महज 61 मिनट (1 घंटा 1 मिनट) की छोटी सी अवधि इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। इस जल्दबाजी के कारण फिल्म कई भावनात्मक पहलुओं को उतने असरदार तरीके से पर्दे पर नहीं उतार पाती, जितने की गुंजाइश थी। अगर पटकथा को थोड़ा और विस्तार और गहराई मिलती, तो फिल्म और इसका संदेश बहुत ज्यादा प्रभावी बन सकता था।

कलाकारों का अभिनय

अभिनय के मोर्चे पर मनोज पाहवा (Manoj Pahwa) हमेशा की तरह अपने सहज अंदाज और कॉमिक टाइमिंग से फिल्म में जान डाल देते हैं। मां ‘सुखमनी’ के किरदार में नीलू कोहली (Neelu Kohli) भी काफी स्वाभाविक लगी हैं।

नॉर्वे रिटर्न बेटे के रूप में मिहिर आहूजा (Mihir Ahuja) एक महत्वाकांक्षी, लेकिन भावुक बेटे के रूप में बिल्कुल फिट बैठते हैं, हालांकि उनके इमोशनल आर्क को और बेहतर तरीके से लिखा जा सकता था। वहीं, अंश की बहन बनीं ऑरा भटनागर बडोनी को स्क्रीन पर ज्यादा मौका नहीं मिल पाया है।

क्यों देखें? कुल मिलाकर, ‘दिलवाली दिवाली’ एक अच्छे संदेश वाली हल्की-फुल्की पारिवारिक फिल्म है। यह अपनी पूरी क्षमता तक भले ही न पहुंच पाए, लेकिन दिवाली के इस त्योहारी सीजन में, खाली समय में परिवार के साथ बैठकर टाइमपास के लिए इसे नेटफ्लिक्स पर देखा जा सकता है।